Bhopal Asra Shelter Mismanagement : भोपाल में गौवंश संरक्षण और निराश्रित पशुओं की देखभाल को लेकर सरकार लगातार दावे करती है लेकिन राजधानी भोपाल के जेल रोड स्थित पशु आश्रय स्थल 'आसरा' की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां घायल और बीमार गौवंश गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं। परिसर में साफ सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है और कर्मचारियों की कमी के कारण पशुओं की देखभाल भी प्रभावित हो रही है।
हैरानी की बात ये है कि यहां पदस्थ डॉक्टर पिछले तीन साल से स्टाफ की मांग कर रहे हैं लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
आपको बता दें आसरा आश्रय स्थल का उद्देश्य शहर में मिलने वाले घायल, बीमार और निराश्रित पशुओं को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना और स्वस्थ होने तक उनका उपचार व देखभाल करना है। लेकिन यहां की मौजूदा स्थिति देखने के बाद कई सवाल खड़े कर रही है। परिसर में घायल और बीमार गौवंश जमीन पर पड़े नजर आते हैं। साफ सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। जिस जगह पशुओं को बेहतर उपचार और देखभाल मिलनी चाहिए वहां बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी दिखाई दे रही है।
आश्रय स्थल में मौजूद डॉ ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि पिछले करीब तीन वर्षों से कर्मचारियों की कमी और जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर भोपाल नगर निगम को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। इसके बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। हर बार मौखिक आश्वासन जरूर मिलता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आता।
डॉ गुप्ता के मुताबिक पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण रोजमर्रा के कामकाज और घायल व बीमार पशुओं की समुचित देखभाल में परेशानी आती है। सीमित संसाधनों के बीच पशुओं का उपचार और उनकी निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में आश्रय स्थल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त स्टाफ और जरूरी संसाधनों की आवश्यकता है।
राजधानी भोपाल में आसरा आश्रय स्थल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। फरवरी 2024 की एक रिपोर्ट में तत्कालीन प्रभारी डॉ सुनीला सरन के हवाले से बताया गया था कि आश्रय स्थल में करीब 150 गायें और इतनी ही संख्या में कुत्ते मौजूद थे। उस समय भी कर्मचारियों पर काम के बढ़ते दबाव और पशुओं की अधिक संख्या के चलते व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई गई थी।
आसरा की मौजूदा स्थिति ने नगर निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब घायल और बीमार पशुओं के उपचार के लिए अलग से आश्रय स्थल संचालित किया जा रहा है तो वहां पर्याप्त कर्मचारी, साफ सफाई और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है। सवाल ये है कि पिछले तीन साल से उठाई जा रही मांगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? गौवंश संरक्षण के दावों के बीच बेजुबान पशुओं को बेहतर देखभाल कब मिलेगी?