Ayushman Bharat Discussed In Rajya Sabha: आयुष्मान भारत योजना समेत सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार के बीच पिछले आठ साल में परिवारों के कुल स्वास्थ्य खर्च में जेब से होने वाले भुगतान की हिस्सेदारी 62.6% से घटकर 43.4% रह गई है। यानी 2014-15 से 2022-23 के बीच इसमें 19.2 प्रतिशत अंक की कमी आई।
भाजपा सांसद रजनीश अग्रवाल ने राज्यसभा में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी परिवारों पर इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने योजना से जुड़े विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों के निष्कर्षों की जानकारी दी।
सरकार के अनुसार, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू होने के बाद से लाभार्थी परिवारों के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत होने का अनुमान है योजना के तहत पात्र परिवारों को मध्यम और विशिष्ट अस्पतालों में भर्ती होने पर प्रति परिवार हर साल 5 लाख रुपए तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज मिलता है। इससे अस्पताल में भर्ती होने पर परिवारों के जेब से होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा आकलन 2022-23 के अनुसार, कुल स्वास्थ्य खर्च में परिवारों की जेब से होने वाले खर्च की हिस्सेदारी 2014-15 में 62.6% थी, जो 2022-23 में घटकर 43.4% रह गई। यानी आठ साल में इसमें 19.2 प्रतिशत अंक की कमी आई। सरकार ने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजनाओं के विस्तार से परिवारों पर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रत्यक्ष वित्तीय बोझ में कमी का संकेत मिलता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों में कैंसर का इलाज समय पर शुरू होने में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। अध्ययन में पाया गया कि गैर-लाभार्थियों में समय पर उपचार शुरू होने में 33% की वृद्धि हुई, जबकि एबी-पीएमजेएवाई लाभार्थियों में यह वृद्धि 90% रही।
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश की गरीब और संवेदनशील आबादी को स्वास्थ्य कवरेज देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। योजना के तहत पात्र लाभार्थी परिवारों को मध्यम और विशिष्ट अस्पतालों में भर्ती होने पर प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज दिया जाता है। इसका उद्देश्य अस्पताल में भर्ती होने के दौरान परिवारों के जेब से होने वाले खर्च को कम करना है।
रजनीश अग्रवाल के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि एबी-पीएमजेएवाई के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों में किया गया है। सरकार इन अध्ययनों के निष्कर्षों का इस्तेमाल योजना को लगातार मजबूत करने और पात्र लाभार्थी परिवारों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के प्रति इसे अधिक जवाबदेह बनाने के लिए कर रही है।