राहुल गांधी के इंदौर दौरे पर विश्लेषण (सोर्स- डिजाइन इमेज)
भोपाल

ANALYSIS: झूठ की गूंज पोस्टरों से घिरे राहुल गांधी! विश्लेषक बोले- उल्टा BJP को हो सकता है सियासी नुकसान

Rahul Gandhi Indore Visit Analysis: राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले झूठ की गूंज पोस्टरों से गरमाई राजनीति, विश्लेषक सुधीर दंडोतिया के मुताबिक, नेगेटिव कैंपेनिंग से राहुल को मिल सकता है उल्टा फायदा।

सजल रघुवंशी

Jhooth Ki Goonj Posters Indore: राहुल गांधी के इंदौर दौरे और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले शहर में पोस्टर पॉलिटिक्स ने सियासी माहौल गरमा दिया है। गीता भवन, पलासिया, एमआर-9, विजय नगर और भंवरकुआं समेत कई इलाकों में ‘झूठ की गूंज’ लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों पर राहुल गांधी के भाषणों में किए गए दावों पर सवाल उठाए गए हैं और क्यूआर कोड के जरिए 40 दावों की जानकारी देने का दावा किया गया है।

इन पोस्टरों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाए हैं, जबकि भाजपा की ओर से प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पोस्टर ‘देशप्रेमियों’ ने लगाए हैं। यानी पोस्टरों के पीछे किसकी भूमिका है, इस पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

नकारात्मक कैंपेनिंग पहुंचा सकती है कांग्रेस को फायदा

इसी पूरे पोस्टर विवाद और राहुल गांधी के युवा संवाद कार्यक्रम को लेकर वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुधीर दंडोतिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी कार्यक्रम के ठीक पहले इस तरह की नकारात्मक कैंपेनिंग का असर उल्टा भी पड़ सकता है। उनके मुताबिक, अगर किसी नेता के कार्यक्रम का विरोध लगातार प्रचारित होता है, तो वह कार्यक्रम और ज्यादा चर्चा में आ जाता है और संबंधित नेता को बिना अतिरिक्त खर्च के प्रचार मिल जाता है।

झूठ की गूंज वाले पोस्टरों से बढ़ सकती है राहुल गांधी की चर्चा

दंडोतिया के विश्लेषण के मुताबिक, ‘झूठ की गूंज’ जैसे पोस्टरों से राहुल गांधी के कार्यक्रम की चर्चा और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के भाषणों को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चलती रही है और भाजपा समर्थक पक्ष उनके कई दावों पर सवाल उठाता रहा है। अगस्त में ‘झूठ की गूंज’ नाम की वेबसाइट द्वारा राहुल गांधी के पिछले छात्र कार्यक्रमों में किए गए 40 दावों की फैक्ट-चेकिंग का दावा भी सामने आया था।

राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम छात्रों के मुद्दे पर केंद्रित

वहीं दूसरी तरफ, राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम सीधे छात्रों और युवाओं से संवाद पर केंद्रित है। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत प्रस्तावित है। आयोजन में करीब 15 हजार छात्रों के बैठने की व्यवस्था की गई है।

नई पीढ़ी पर नजर, 2027-28 के पहले बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

सुधीर दंडोतिया के मुताबिक, आने वाले राजनीतिक दौर में युवा और नई जेनरेशन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक वर्ग है। यही वजह है कि कांग्रेस हो या भाजपा, सभी दल युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान भी इसी युवा संवाद की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इंदौर इसका पांचवां कार्यक्रम है। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ऐसे कार्यक्रम हो चुके हैं।

Explainer: क्या वाकई ग्रीन हैं ग्रीन क्रैकर्स, प्रदूषण, सेहत और जेब पर कितना असर? आसान भाषा में समझें

ओडिशा सरकार का शिक्षकों को बड़ा तोहफा, प्रभारी प्रधानाचार्यों को हर महीने मिलेगा 10 हजार रुपये तक भत्ता

Festival Business: दिवाली पर देश में 7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, कैट ने 15-18% वृद्धि की जताई उम्मीद

प्रधानमंत्री आवास योजना: नई लिस्ट में नाम आया या नहीं, ऑनलाइन आवेदन कैसे करें; जानें सारी डिटेल

Platform Ticket: दिवाली और छठ पर रेलवे स्टेशनों में एंट्री होगी मुश्किल? 15 नवंबर तक प्लेटफॉर्म टिकट पर रोक