MP Rain News : मध्य प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अब सिर्फ 4 दिन बाकी हैं, लेकिन प्रदेश में बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से पीछे है। सितंबर के आखिरी दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई बारिश के बाद प्रदेश में अब तक औसतन 904 मिमी यानी 35.6 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 95.4 प्रतिशत है। मौसम विभाग के अनुसार 96 से 104 प्रतिशत बारिश होने पर ही इसे सामान्य बारिश की श्रेणी में माना जाता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 25 जिलों में 100 प्रतिशत या इससे ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं 90 से 99 प्रतिशत बारिश वाले जिलों की संख्या भी 7 है। ऐसे में मानसून के बचे चार दिनों में बड़ी बारिश नहीं हुई तो प्रदेश के करीब आधे जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाएगा। इंदौर संभाग बारिश के मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ है।
प्रदेश में पूर्वी और पश्चिमी हिस्से की बारिश में बड़ा अंतर देखने को मिला है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से करीब 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के आंकड़ों में सुधार हुआ है और शुक्रवार तक यह औसत के करीब पहुंच गया।
पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कई जिलों में अब भी 4 से 21 प्रतिशत तक बारिश की कमी है। इनमें बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी शामिल हैं।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा है। आलीराजपुर में अब तक 20 इंच भी बारिश नहीं हुई है। इसके अलावा अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश में ज्यादा बारिश मऊगंज, सतना और उमरिया में हुई है। इन जिलों में आंकड़ा करीब 50 इंच तक पहुंच गया है। वहीं अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, निवाड़ी, पन्ना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी समेत 100 प्रतिशत से ज्यादा बारिश वाले जिलों में भी मानसून का कोटा पूरा हो चुका है।
भोपाल मौसम विभाग के अनुसार मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इसके बाद अक्टूबर में होने वाली बारिश को मानसूनी बारिश के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता। इसलिए प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा हासिल करने के लिए अब सिर्फ चार दिन बचे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक इस अवधि में भारी बारिश की संभावना कम है, ऐसे में इस बार प्रदेश का ओवरऑल बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहने की संभावना है।