Highlights:
ग्वालियर-चंबल संभाग में रविवार और सोमवार को आंधी-बारिश के आसार।
बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने से 15 अक्टूबर के बाद फिर बरस सकते हैं बादल।
इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री, दिन में कई शहरों में पारा 36 डिग्री के पार।
मानसून सीजन में MP में सामान्य से करीब 1.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा।
MP Weather Update : मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज स्थिर नहीं हुआ है। कहीं दिन में तेज धूप लोगों को गर्मी का अहसास करा रही है, तो कहीं रात का तापमान गिरने से ठंडक बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से ग्वालियर-चंबल संभाग में रविवार और सोमवार को बारिश होने की संभावना है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा नया मौसमी सिस्टम 15 अक्टूबर के बाद प्रदेश में दोबारा बारिश की गतिविधियां बढ़ा सकता है।
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में बारिश के आसार हैं। इन इलाकों में तेज हवा और आंधी के साथ पानी गिर सकता है। इससे पहले शनिवार को सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहे। कुछ स्थानों पर आंधी का असर भी देखने को मिला।
अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के मौसम पर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र का असर पड़ सकता है। इसके सक्रिय होने से 15 अक्टूबर के बाद मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है। फिलहाल दिन में धूप और रात में ठंडक वाला मौसम बने रहने की संभावना है।
प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट का असर महसूस होने लगा है। बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सूचीबद्ध शहरों में सबसे कम रहा। अमरकंटक में पारा 16.6 डिग्री, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8 डिग्री, शाजापुर में 17 डिग्री और कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दूसरी ओर, बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन में दिन का तापमान 36 डिग्री या इससे ऊपर बना हुआ है। यानी प्रदेश में दिन और रात के मौसम के बीच अंतर बढ़ रहा है।
मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में प्रदेश में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिलती रही हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने और दिन में धूप निकलने के साथ रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन अलग-अलग मौसमी प्रणालियों के कारण इसके बाद भी बारिश की गतिविधियां जारी हैं।
जून से सितंबर के मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक पानी गिरा, जबकि पश्चिमी हिस्से में बारिश का आंकड़ा औसत से 12 प्रतिशत नीचे रहा।
मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़ों में जिलों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। भोपाल, राजगढ़, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और उमरिया समेत 25 जिलों में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इसके उलट नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, जबलपुर, रीवा, सागर, इंदौर, उज्जैन, धार, झाबुआ और आलीराजपुर समेत 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी हिस्से के कुछ जिलों में बारिश की कमी 9 से 51 प्रतिशत तक रही। ऐसे में प्रदेश में अक्टूबर के दौरान होने वाली बारिश स्थानीय जलभराव और बारिश की कमी के आंकड़ों पर असर डाल सकती है।