जीतू पटवारी (फोटो सोर्स- नवभारत) 
भोपाल

MP में तबादलों पर रोक, नगरीय विकास विभाग के 100 आदेश निरस्त होने से मचा बवाल, कांग्रेस ने उठाए सवाल

Jitu Patwari Letter CM : मध्यप्रदेश में तबादलों पर फिर रोक लग गई है। नगरीय विकास विभाग के करीब 100 तबादला आदेश निरस्त होने के बाद भ्रष्टाचार और लेन-देन के आरोपों से सियासत गरमा गई है।

प्रीतेश जैन

MP Transfer Ban Controversy: मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार ने सभी प्रकार के तबादलों पर दोबारा रोक लगा दी है। इस बीच नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी किए गए करीब 100 तबादला आदेश अचानक निरस्त कर दिए गए, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूरे मामले को लेकर अब भ्रष्टाचार और लेन-देन के आरोपों ने सियासी माहौल गर्मा दिया है। मामले में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने तबादलों के लिए 15 जून तक की समय सीमा तय की थी। हालांकि तय अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर सरकार ने 24 घंटे का अतिरिक्त समय दिया था। आरोप है कि इसी अतिरिक्त अवधि में बड़े पैमाने पर तबादले किए गए और बाद में कई आदेशों को अचानक रद्द कर दिया गया।

100 से ज्यादा तबादला आदेश निरस्त

नगरीय विकास विभाग के करीब 100 तबादला आदेश निरस्त होने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों में असमंजस की स्थिति बन गई है। वहीं शिक्षा विभाग में भी स्वैच्छिक तबादलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शिक्षकों की आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उनके तबादले कर दिए गए, जो नियमों के खिलाफ माना जा रहा है।

पटवारी ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

तबादलों को लेकर अब विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि तबादलों के नाम पर बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ है और सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों तक इसकी चर्चा हो रही है।

सरकार पर उठाए सवाल

जीतू पटवारी ने कहा कि यदि सरकार के पास इन आरोपों का जवाब है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार की चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि पूरा मामला सत्ता के शीर्ष स्तर की जानकारी में हुआ है। कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन पर बड़ा सवाल बताया है। विपक्ष का कहना है कि तबादलों की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और राजनीतिक दबाव में निर्णय लिए गए। वहीं कई अधिकारी भी आदेश निरस्त होने से असमंजस में हैं। अचानक हुए बदलावों से विभागीय कामकाज प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार की ओर से प्रतिक्रिया नहीं

फिलहाल सरकार की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन तबादलों को लेकर मचे घमासान ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आरोपों की जांच कराती है या नहीं।

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