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भोपाल

एमपी में 18,675 करोड़ रुपये का मेगा रोड प्लान; भोपाल बायपास समेत 7 सड़कों के लिए सरकार ने कसी कमर

Bhopal By Pass Project: मध्य प्रदेश में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) से बनेंगी 7 प्रमुख सड़कें, भोपाल बायपास सहित 489 किमी लंबे नेटवर्क पर खर्च होंगे ₹18,675 करोड़।

सजल रघुवंशी

MP MPRDC Road Projects: मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क और परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर सड़क परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। भोपाल बायपास सहित सात प्रमुख सड़कों का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत किया जाएगा।

जिसमें सरकार और निजी कंपनियां संयुक्त रूप से निवेश करेंगी।  इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद टोल संग्रहण का अधिकार सरकार के पास रहेगा। प्रस्तावित सड़कों की कुल लंबाई 489 किलोमीटर होगी, जबकि इन पर लगभग 18,675 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

राज्य स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया प्रस्ताव

मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने राज्य में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए सात महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया है। प्रस्तावित परियोजनाओं में राजधानी भोपाल का ईस्टर्न बायपास भी शामिल है, जिसे यातायात दबाव कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं की कुल लंबाई 489 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जबकि इन पर लगभग 18,675 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

क्या है एचएएम मॉडल?

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 में शुरू किया गया एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) आधारित मॉडल है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निजी निवेश को बढ़ावा देना, निवेशकों का वित्तीय जोखिम कम करना और लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है। इस व्यवस्था में परियोजना की लागत और जोखिम का वहन सरकार तथा निजी डेवलपर संयुक्त रूप से करते हैं, जिससे निर्माण कार्य समयबद्ध और अधिक प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।

इस मॉडल के तहत 60 प्रतिशत निवेश करते है निजी डेवलपर

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत परियोजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार निर्माण अवधि के दौरान वहन करती है, जबकि शेष 60 प्रतिशत निवेश निजी डेवलपर द्वारा किया जाता है। परियोजना पूरी होने के बाद सरकार निजी कंपनी को उसकी निवेशित राशि निर्धारित अवधि में ब्याज सहित लौटाती है।

यह भुगतान आमतौर पर 15 से 20 वर्षों तक छमाही किस्तों में किया जाता है। इसके अलावा सड़क के संचालन और रखरखाव के लिए भी निजी डेवलपर को अलग से भुगतान किया जाता है, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और दीर्घकालिक देखरेख सुनिश्चित हो सके।

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