Highlights:
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचूर को रिश्वत के आरोपों के बीच पद से हटाए जाने के बाद निजी स्टाफ पर सवाल।
राजेंद्र सिंह गुर्जर, राजेश हेनरी और दिलीप राज द्विवेदी से जुड़े पुराने घटनाक्रम भी चर्चा में।
मंत्रियों के कार्यालयों में ट्रांसफर, नियुक्तियों और कथित सौदेबाजी से जुड़े मामले पहले भी सामने आए।
मंत्री उदय प्रताप सिंह के निजी सचिव वीरेंद्र तिवारी के विभागीय प्रभाव को लेकर चर्चा।
संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के OSD जीवन सिंह राजक पर पुरस्कार के लिए अपना नाम आगे बढ़ाने का आरोप।
MP Ministers Personal Staff Controversy : उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचूर को रिश्वत के आरोपों के बीच पद से हटाए जाने के बाद मंत्रियों के निजी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने सरकारी कार्यालयों में नियुक्तियों और जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय दीपम रायचूर की उप मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्ति के पक्ष में नहीं था। इसके बावजूद उनकी नियुक्ति कराई गई। यह दावा भी किया जा रहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद दिलीप राज त्रिवेदी डिप्टी सीएम कार्यालय में सेवाएं देते रहे हैं।
जगदीश देवड़ा के पूर्व विशेष सहायक राजेंद्र सिंह गुर्जर का नाम पुराने समाचार अभिलेखों में मिलता है। वर्ष 2010 के आसपास उन्हें मूल विभाग में वापस भेजे जाने की खबरें आई थीं। उस दौरान खाचरौद जेल से सिमी कार्यकर्ताओं की रिहाई के मामले में उनकी कथित भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। वहीं, राजेश हेनरी के देवड़ा के निजी स्टाफ से हटने को लेकर भी चर्चाएं रही हैं। हालांकि, उन्हें किस प्रशासनिक कारण से हटाया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। डॉ. दिलीप राज द्विवेदी भी लंबे समय तक देवड़ा के स्टाफ से जुड़े रहे। अगस्त 2024 में उनकी विशेष सहायक के रूप में नियुक्ति की खबर प्रकाशित हुई थी।
मंत्रियों के निजी स्टाफ से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। हाल ही में कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के आवासीय कार्यालय में ट्रांसफर के नाम पर कथित रिश्वत लेने को लेकर एक पत्रकार के स्टिंग ऑपरेशन की चर्चा सामने आई थी। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।
वर्ष 2020 में हनीट्रैप मामले के दौरान तत्कालीन मंत्रियों के कार्यालयों से जुड़े अरुण निगम और हरीश कुमार खरे के नाम चर्चा में आए थे। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद उन्हें पदों से हटाया गया था। वर्ष 2023 में कांग्रेस ने तत्कालीन मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के OSD ब्रजेंद्र श्रीवास्तव का एक वीडियो जारी किया था। कांग्रेस ने इसे कथित सौदेबाजी से जोड़कर पेश किया था। इन घटनाओं ने मंत्रियों के निजी स्टाफ की गतिविधियों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
प्रह्लाद सिंह पटेल के मंत्री बनने के बाद उनके कार्यालय में OSD नियुक्त किए गए एलपी पाठक के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद उन्हें स्टाफ से हटा दिया गया था। यह उदाहरण ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के संदर्भ में चर्चा में रहा।
वर्ष 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों के कार्यालयों में विवादित अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं करने का रुख अपनाया था। इसके बावजूद निजी स्टाफ की नियुक्तियों को लेकर देरी और मंत्रियों की पसंद के कर्मचारियों को तैनात कराने की चर्चाएं सामने आती रहीं।
स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के निजी सचिव वीरेंद्र तिवारी भी चर्चा में हैं। वह पहले कई मंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं। उनका मूल पद प्रौढ़ शिक्षा केंद्र से जुड़ा बताया जाता है। परिवहन विभाग में उनके कथित प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के OSD जीवन सिंह राजक पर आरोप है कि उन्होंने विभाग की ओर से दिए जाने वाले एक पुरस्कार के लिए अपना नाम आगे बढ़ाया था।
मंत्रियों के निजी स्टाफ से जुड़े इन अलग-अलग मामलों ने नियुक्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आरोपों की निष्पक्ष जांच, आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर ही इन मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।इसके अलावा, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के ओएसडी जीवन सिंह राजक पर आरोप है कि उन्होंने विभाग द्वारा दिए जाने वाले एक पुरस्कार के लिए खुद का नाम आगे बढ़ा दिया था।