Highlights:
लखनऊ में श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी के बाद MP का हनीट्रैप चर्चा में है।
सितंबर 2019 में इंदौर नगर निगम के इंजीनियर की शिकायत के बाद हनीट्रैप मामला सामने आया था।
श्वेता विजय जैन और आरती दयाल समेत कई महिलाओं के नाम जांच के दौरान सामने आए।
कथित वीडियो, सीडी और पेनड्राइव को लेकर प्रदेश में राजनीतिक विवाद हुआ।
MP Honey Trap Case : मध्य प्रदेश का बहुचर्चित हनीट्रैप कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। लखनऊ में श्रद्धा दुबे से जुड़े मामले ने साल 2019 में मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचाने वाले हनीट्रैप प्रकरण की यादें ताजा कर दी हैं। मध्य प्रदेश में सामने आए इस मामले में कथित ब्लैकमेलिंग, आपत्तिजनक वीडियो, पेनड्राइव और रसूखदार लोगों से संपर्क जैसे कई पहलू चर्चा में रहे थे।
तत्कालीन कमलनाथ सरकार के दौर में सामने आए इस प्रकरण ने राजनीतिक विवाद को भी हवा दी थी। मामले में कई महिलाओं के नाम सामने आए और जांच के दौरान नेताओं तथा अधिकारियों से कथित संबंधों को लेकर सवाल उठे। हालांकि, आरोपों और न्यायिक रूप से साबित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
मध्य प्रदेश में सितंबर 2019 में हनीट्रैप प्रकरण उस समय सामने आया, जब इंदौर नगर निगम के तत्कालीन इंजीनियर हरभजन सिंह ने कथित ब्लैकमेलिंग की शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आपत्तिजनक वीडियो के जरिए उनसे करोड़ों रुपये वसूलने की कोशिश की जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और धीरे-धीरे कई नाम सामने आए। प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी।
जांच के दौरान श्वेता जैन, आरती दयाल, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी और मोनिका यादव समेत कई महिलाओं के नाम सामने आए थे। आरोपों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य रसूखदार लोगों से संपर्क बनाते थे और कथित आपत्तिजनक वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग करते थे। जांच में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका को लेकर कई पहलुओं की पड़ताल की गई।
हनीट्रैप मामले में कथित आपत्तिजनक वीडियो, सीडी और पेनड्राइव को लेकर काफी चर्चा हुई थी। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इन रिकॉर्डिंग में कई प्रभावशाली लोगों से जुड़ी सामग्री मौजूद थी। इस दावे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया था। कथित वीडियो में कौन-कौन शामिल था, उनकी संख्या कितनी थी और सामग्री की प्रामाणिकता क्या थी, इन सवालों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।
2019 में मामला सामने आने के बाद तत्कालीन कमलनाथ सरकार के दौर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। बाद में मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी हनीट्रैप प्रकरण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे। जांच की दिशा, कथित वीडियो और महत्वपूर्ण सबूतों को लेकर भी सवाल उठते रहे। इस मामले ने राजनीतिक जवाबदेही और जांच की पारदर्शिता को लेकर बहस को जन्म दिया। हनीट्रैप प्रकरण में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रहीं।
लखनऊ में व्यवसायी शिव शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में नागपुर की मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला कि श्रद्धा और जुल्फिकार साल 2024 से लिव-इन में रहते थे। जुल्फिकार खुद को अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम का करीबी बताता था और अपने रसूख के जरिए श्रद्धा की बड़े नेताओं, पुलिस अधिकारियों और बिल्डरों तक पहुंच बनवाता था। आरोप हैं कि दोनों प्रभावशाली लोगों हनी ट्रैप में फंसाकर रंगदारी वसूलते थे। इसी बीच व्यवसायी शिव शर्मा की श्रद्धा के फ्लैट से गिरकर हुई संदिग्ध मौत के बाद यह मामला चर्चा में आया है।