MP Government School Uniform Delay: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र का आगाज तो हो चुका है, लेकिन पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए इस साल भी समय पर स्कूल ड्रेस मिलना मुहाल नजर आ रहा है।
कैबिनेट स्तर पर स्कूली बच्चों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म देने की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बावजूद, जमीनी स्तर पर सुस्त प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अब यह साफ हो चुका है कि आधा सत्र बीत जाने के बाद यानी दिसंबर तक ही बच्चों के हाथों में यूनिफॉर्म पहुंच सकेगी। प्रदेश के करीब 55 लाख विद्यार्थियों से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी का जिम्मा राज्य शिक्षा केंद्र (RSK) के पास है, जबकि निविदा (टेंडर) की पूरी जिम्मेदारी पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपी गई है।
पाठ्यपुस्तक निगम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल यूनिफॉर्म सप्लाई के लिए निविदा का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया जा रहा है। इस प्रारूप को ही अंतिम रूप देकर जारी करने में करीब एक महीने का समय लग जाएगा। इसके बाद खुली निविदा के जरिए कंपनियों का चयन करने, दरें तय करने और कपड़ों के निर्माण व सप्लाई में 3 से 4 महीने का अतिरिक्त समय लगना तय है। खुद विभागीय अफसर भी मान रहे हैं कि दिसंबर से पहले बच्चों तक ड्रेस पहुंचाना संभव नहीं है।
यूनिफॉर्म वितरण की राह में केवल टेंडर की देरी ही रोड़ा नहीं है, बल्कि सरकार स्तर पर अभी कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले होने बाकी हैं।
अगर पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो सरकार ने यूनिफॉर्म बांटने के कई तरीके (मॉडल) बदले, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। हर साल सत्र शुरू होने के 4 से 5 महीने बाद ही बच्चों को ड्रेस नसीब हुई सत्र 2016-17 से 2018-19 शाला प्रबंधन समितियों (SMC) को जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने स्थानीय दर्जियों से कपड़े सिलवाकर बांटे।
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फिर बाद में सत्र 2019-20 सरकार ने महिला स्व-सहायता समूहों (SHGS) को काम सौंप दिया। सत्र 2020-21 और 2021-22 यानी कोविड काल के दौरान कपड़ों के बजाय सीधे छात्र या अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी (डीबीटी) के जरिए नकद राशि भेजी गई। सत्र 2022-23 से 2024-25: सरकार ने दोबारा महिला स्व-सहायता समूहों पर भरोसा जताया, लेकिन हर बार वितरण में भारी देरी हुई।