मोहन कैबिनेट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार फिर लेगी 2800 करोड़ का कर्ज, कुल ऋण 5 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचने की संभावना

MP State Loan News : मध्यप्रदेश सरकार 2800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है। विकास परियोजनाओं पर राशि खर्च होगी। नए ऋण के बाद राज्य पर कुल कर्ज करीब 5.02 लाख करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है।

प्रीतेश जैन

MP Government 2800 Crore Loan: मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर बाजार से बड़ी राशि जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार 2800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है, जिसके लिए वित्त विभाग ने राज्य विकास ऋण (एसजीएस) के तहत बॉन्ड जारी करने की अधिसूचना जारी की है। यह राशि दो अलग-अलग चरणों में जुटाई जाएगी।

वित्त विभाग के अनुसार सरकार 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के दो बॉन्ड जारी करेगी। इनकी नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। सरकार का उद्देश्य विकास और अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है।

2800 करोड़ रुपए जुटाएगी सरकार

पहले चरण में 7.64 प्रतिशत ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2034 बॉन्ड का पुनः निर्गम किया जाएगा, जिसके माध्यम से 1600 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि आठ वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं दूसरे चरण में 7.83 प्रतिशत ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2048 बॉन्ड जारी कर 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 वर्ष होगी।

विकास परियोजनाओं पर खर्च होंगे रुपए

सरकार का कहना है कि जुटाई गई राशि का उपयोग प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित विकास परियोजनाओं पर किया जाएगा। इसमें सड़क निर्माण, सिंचाई योजनाएं, ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं का उन्नयन तथा अन्य सार्वजनिक अधोसंरचना परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं। इस संबंध में केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त की जा चुकी है।

5.02 लाख करोड़ रुपए का कुल कर्ज

नए कर्ज के बाद चालू वित्तीय वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लिया गया कुल ऋण 13,800 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। इसके साथ ही राज्य पर कुल देनदारी भी बढ़कर लगभग 5.02 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक प्रदेश पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज दर्ज था। सरकार का दावा है कि पूर्व में लिए गए ऋण का उपयोग सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में किया गया है, जिससे प्रदेश की आधारभूत संरचना को मजबूती मिली है।

सरकार के सामने ये चुनौती

हालांकि लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों की नजर भी राज्य की वित्तीय स्थिति पर बनी हुई है। उनका मानना है कि यदि ऋण का उपयोग उत्पादक और विकासोन्मुखी परियोजनाओं में किया जाता है तो इसका लाभ दीर्घकाल में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है। वहीं ऋण प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।

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