MP Government Medical Colleges PPP : मध्य प्रदेश में करीब 4 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार किए गए नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पर राज्य सरकार ने कदम पीछे खींच लिया है।
नवभारत में खबर को प्रमुखता से सामने लाए जाने और प्रस्ताव को लेकर विपक्ष व डॉक्टरों के विरोध के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 24 सितंबर को स्थिति स्पष्ट कर दी। विभाग ने कहा है कि इन मेडिकल कॉलेजों का संचालन और संधारण पूरी तरह सरकार के पास ही रहेगा।
दरअसल, 17 सितंबर को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से नौ मेडिकल कॉलेजों और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को PPP मॉडल पर देने की योजना सामने आई थी। इसके लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। एडवाइजर की जिम्मेदारी PPP मॉडल तैयार करने से लेकर निजी कंपनी या भागीदार के चयन तक की प्रक्रिया में भूमिका निभाने की थी।
PPP मॉडल के प्रस्ताव के दायरे में नीमच, श्योपुर, सिंगरौली, मंडला, राजगढ़, बुदनी, छतरपुर, दमोह और एक अन्य मेडिकल कॉलेज शामिल थे। इनमें नीमच, श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में पिछले दो साल से 100-100 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश और पढ़ाई भी चल रही है। ऐसे में इन संस्थानों के संचालन और पहले से तैयार व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे थे।
प्रस्ताव सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं और डॉक्टरों के विभिन्न संगठनों ने इसका विरोध किया। विरोध करने वालों ने सवाल उठाया कि जिन मेडिकल कॉलेजों के भवन, जमीन, मशीनरी और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर केंद्र और राज्य सरकार के करदाताओं के करीब 4 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, उन्हें निजी संस्थाओं को क्यों सौंपा जाए। इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए।
मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेज को PPP मॉडल पर देने का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2021 में उज्जैन मेडिकल कॉलेज को इसी मॉडल पर देने की तैयारी की गई थी। उस समय भी इस प्रस्ताव को लेकर कड़ा विरोध हुआ था। अब एक बार फिर नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल पर देने की योजना सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया।
लगातार उठ रहे विरोध और सवालों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव वापस ले लिया है। शासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा निर्मित और निर्माणाधीन सभी चिकित्सा महाविद्यालयों का संचालन पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगा। इन्हें PPP पद्धति पर नहीं दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले के बाद नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। जिन संस्थानों को PPP मॉडल के तहत निजी भागीदार के साथ संचालित करने की प्रक्रिया प्रस्तावित थी, अब उनका संचालन सरकार की व्यवस्था के तहत ही किया जाएगा। इस फैसले के साथ मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में सौंपे जाने की आशंका पर भी विराम लग गया है।