Explainer : MP में लौटी सरकारी बस सेवा: क्या है 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना', जानिए सारे सवालों के जवाब

MP Government Bus Service:MP में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा फिर शुरू हो गई है। सुगम परिवहन सेवा के तहत 351 बसों की शुरुआत हो गई है। PPP मॉडल, रूट, किराया, निजी ऑपरेटर और सुविधाओं की पूरी जानकारी जानिए।
Madhya Pradesh Sugam Parivahan Seva
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरूफोटो सोर्स- सोशल मीडिया
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MP Sugam Parivahan Seva : मध्य प्रदेश में 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी बस सेवा शुरू हो रही है। आज मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल से 351 बसों का शुभारंभ किया। इस बार बस सेवा का संचालन PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर होगा। सरकार रूट और किराया तय करेगी, जबकि बसों के संचालन की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी।

हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर मौजूदा निजी बस ऑपरेटरों में असंतोष है। 15 साल पुरानी बसों के संचालन और परमिट से जुड़े नियमों को लेकर भी विवाद चल रहा है। आखिर नई योजना कैसे काम करेगी, सरकार को 21 साल बाद बस सेवा शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी और आपके गांव-शहर तक बस कब पहुंचेगी? इन सभी सवालों के जवाब वरिष्ठ पत्रकार सुधीर दंडोतिया से जानिए।

सवाल 1: 21 साल बाद सरकार को बस सेवा फिर शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

जवाब : साल 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के कार्यकाल में मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम को बंद कर दिया गया था। उस समय निगम पर 756 करोड़ रुपए का कर्ज था और हर महीने करीब 5 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था। इसके बाद से प्रदेश की सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से निजी बस ऑपरेटरों पर निर्भर रही।

कम यात्री वाले रूट पर फोकस

वरिष्ठ पत्रकार सुधीर दंडोतिया के मुताबिक सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि निजी ऑपरेटर आमतौर पर उन्हीं रूटों पर बसें चलाते हैं, जहां पर्याप्त यात्री मिलते हैं। कम यात्री वाले दूर-दराज के गांवों और आदिवासी इलाकों में परिवहन सेवा की कमी रहती है। नई योजना के तहत सभी 89 आदिवासी विकासखंडों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 1,036 रूट तय किए गए हैं, जिनमें 150 शहरी, 450 इंटरसिटी और 436 अंतरराज्यीय रूट शामिल हैं।

सवाल 2: नई बस सेवा का मॉडल PPP कैसे काम करेगा?

जवाब : इस बार बस सेवा सरकारी होगी, लेकिन सरकार खुद बसों का संचालन नहीं करेगी। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाया जाएगा। सरकार रूट, किराया और सिस्टम का ढांचा तय करेगी, जबकि जमीनी स्तर पर बसों के संचालन की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी।

सरकार के हाथ में रहेगा नियंत्रण

इस व्यवस्था के लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (MPYPIL) नाम की सरकारी कंपनी बनाई गई है। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष हैं। संचालन को लेकर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और रीवा के लिए 7 क्षेत्रीय कंपनियां बनाई गई हैं। हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई जाएगी, जिसमें जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति व्यवस्था की निगरानी करेगी। नए बस स्टैंड भी इसी मॉडल पर विकसित किए जाएंगे।

सवाल 3: अभी जो निजी बसें चल रही हैं, उनका भविष्य क्या होगा?

जवाब : सरकार ने अभी तक मौजूदा करीब 15,000 निजी परमिट वाली बसों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं की है। यही वजह है कि निजी बस ऑपरेटरों में असंतोष और चिंता है।

ऑपरेटरों और सरकार के बीच विवाद

बस ओनर्स एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार धीरे-धीरे निजी परमिट अपने नियंत्रण में लेकर उन्हें वापस ऑपरेटरों को किराए पर देना चाहती है, ताकि हर बस से रॉयल्टी वसूली जा सके। ऑपरेटरों का कहना है कि वे पहले से ही घाटे में हैं। यह विवाद हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। सरकार ने ऑपरेटरों की चिंताओं को सुनने के लिए तीन मंत्रियों—उदय प्रताप सिंह, तुलसीराम सिलावट और नरेंद्र शिवाजी पटेल—का समूह बनाया है। यह समूह अपनी सिफारिशें सरकार को देगा।

सवाल 4: 15 साल पुरानी बसों को चलाने पर बैन का विवाद क्या है?

जवाब : नवंबर 2025 में सरकार ने आदेश जारी किया था कि 15 साल से पुरानी कमर्शियल बसें, भले ही उनके पास फिटनेस और परमिट हो, सड़कों पर नहीं चलेंगी। अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने भी सरकार के इस आदेश को सही ठहराया था।

ऑपरेटरों की दलील क्या है?

बस मालिकों का कहना है कि जब ऑल-इंडिया परमिट पर 20 साल पुरानी बस 2,000 किलोमीटर दूर मुंबई जा सकती है, तो वही बस मध्य प्रदेश में 100 किलोमीटर के रूट पर क्यों नहीं चल सकती। ऑपरेटरों ने 25 सितंबर को लॉन्च हो रही 351 बसों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इनमें कुछ पुरानी बसें, जैसे सूत्र सेवा की बसें, शामिल हैं जिन्हें रंग-रोगन करके नया दिखाया जा रहा है।

सवाल 5: आपके शहर या गांव तक बस कब पहुंचेगी? किराया और सुविधाएं क्या होंगी?

जवाब : नई योजना को एक साथ पूरे मध्य प्रदेश में लागू नहीं किया जा रहा है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में 351 बसें बड़े रूटों और कुछ चुनिंदा आदिवासी ब्लॉक को कवर करेंगी। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे निजी ऑपरेटर इस योजना यानी MPYPIL से जुड़ेंगे, बसों की संख्या बढ़ेगी और नेटवर्क को गांव-कस्बों तक विस्तार दिया जाएगा।

किराया सरकार तय करेगी

नई व्यवस्था में बसों का किराया मध्य प्रदेश सरकार तय करेगी। इसका उद्देश्य यात्रियों को निर्धारित और किफायती किराए पर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे त्योहारी सीजन में निजी बसों में किराए को लेकर होने वाली मनमानी पर भी रोक लगाने की उम्मीद है।

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बसों में होंगी हाईटेक सुविधाएं

नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा पर भी फोकस किया गया है। महिला और यात्री सुरक्षा के लिए हर बस में 7 CCTV कैमरे, इमरजेंसी पैनिक बटन और GPS सिस्टम लगाया जाएगा। GPS के जरिए बस की लाइव लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। यानी सरकार की योजना सिर्फ बस सेवा शुरू करने की नहीं, बल्कि इसे एक मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ संचालित करने की भी है।

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