MP Electricity Surplus : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार 22 सितंबर को भोपाल में ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित “नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद” कार्यशाला में हिस्सा लिया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बिजली की खपत बढ़ने के साथ सरकार उत्पादन और संधारण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के साथ नई बिजली उत्पादन इकाइयां शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बिजली गुल रहने वाला मध्यप्रदेश आज “बिजली फुल स्टेट” बन चुका है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश ने पावर कट का लंबा दौर देखा है, लेकिन अब नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में राज्य अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ रहा है। उन्होंने बताया कि नीमच-मंदसौर में ग्रीन गो ने 2000 मेगावॉट क्षमता का प्लांट स्थापित किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में 4 से 6 वर्ष लगते हैं, जबकि मध्यप्रदेश में यह काम दो से ढाई साल में पूरा हो रहा है।
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के गठन से लेकर 2002-03 तक राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5000 मेगावॉट थी, जो अब बढ़कर 32 हजार मेगावॉट हो गई है। इसमें 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है। उन्होंने कहा कि अब विंड, सोलर और पंप स्टोरेज के जरिए बिजली उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पानी से और पानी के ऊपर भी बिजली बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से 2.70 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग तेज गति से योजनाओं को लागू कर विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है। प्रदेश में करीब 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और राज्य चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली कंपनियों से अपना घाटा कम करने और क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों के लिए उपयोगी साबित होगा। वहीं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और सशक्त बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे।