

CM Mohan Yadav Cheetah Release : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार 20 सितंबर को नीमच जिले के रामपुरा तहसील स्थित खिमला पार्टीशन पहुंचेंगे। दोपहर 3 बजे से 3.30 बजे तक प्रस्तावित कार्यक्रम में वे गांधीसागर अभयारण्य में मादा चीता CCB2 को विमुक्त करेंगे। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से ग्राम बासी स्थित डीबीएल हेलीपैड पहुंचेंगे और यहां से सड़क मार्ग से चीता प्रोजेक्ट के कार्यक्रम स्थल जाएंगे।
CCB2 का सफर बोत्सवाना से भारत और फिर कूनो तक पहुंचा है। फरवरी 2026 में बोत्सवाना से भारत लाए गए नौ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में क्वारंटाइन और अनुकूलन प्रक्रिया से गुजारा गया था। अब CCB2 को गांधीसागर के नए आवास में स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रोजेक्ट चीता की योजना कूनो और गांधीसागर को एक बड़े संरक्षण परिदृश्य के रूप में विकसित करने की है।
कूनो में परिस्थितियों के अनुरूप ढलने के बाद CCB2 अब गांधीसागर में अपने नए क्षेत्र में फर्राटे भरती नजर आएगी। गांधीसागर को प्रोजेक्ट चीता के तहत देश में चीतों के लिए दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। आधिकारिक योजना में कूनो-गांधीसागर लैंडस्केप में चीतों की एक बड़ी और टिकाऊ मेटापॉपुलेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
CCB2 के विमुक्त होने के बाद गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो जाएगी। इसके साथ ही यहां चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना की गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा। गांधीसागर में क्वारंटाइन, अनुकूलन और प्रबंधन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गई हैं, ताकि चीतों को वैज्ञानिक निगरानी के साथ नए आवास में स्थापित किया जा सके।
भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। कूनो में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद फरवरी 2026 में बोत्सवाना से भी चीते लाए गए। अब गांधीसागर को जोड़कर परियोजना का दायरा बढ़ाया जा रहा है। केंद्र की आधिकारिक योजना कूनो-गांधीसागर क्षेत्र में 60-70 चीतों की दीर्घकालिक मेटापॉपुलेशन स्थापित करने की है।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, एसपी राजेश व्यास, डीएफओ नीमच एसके अटोदे और डीएफओ मंदसौर संजय रायखेरे ने कार्यक्रम स्थल और हेलीपैड का निरीक्षण किया। सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शाम करीब 4.50 बजे भोपाल के स्टेट हैंगर पहुंचेंगे। CCB2 का गांधीसागर स्थानांतरण भारत में चीता संरक्षण के अगले चरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।