लोक शिक्षण संचालनालय (फोटो सोर्स- नवभारत) 
भोपाल

मध्य प्रदेश में अटैच शिक्षकों पर सख्ती की तैयारी, मंत्रालय से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक से मांगी गई सूची

MP Teacher News : विभिन्न विभागों में सालों से अटैच शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से सूची मांगी है और शिक्षकों को मूल स्कूलों में लौटने के निर्देश दिए हैं।

प्रीतेश जैन

MP Attached Teachers: मध्य प्रदेश में वर्षों से स्कूलों से बाहर मंत्रालय, कलेक्टर कार्यालय, जनप्रतिनिधियों और अन्य सरकारी कार्यालयों में अटैच होकर काम कर रहे शिक्षकों पर अब स्कूल शिक्षा विभाग सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय ने प्रदेशभर से ऐसे शिक्षकों का पूरा ब्योरा तलब किया है, जिसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजा जाएगा।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में 213 शिक्षक विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यालयों में पदस्थ पाए गए हैं। इनमें अकेले भोपाल जिले के 52 शिक्षक शामिल हैं। विभाग का मानना है कि सभी जिलों की रिपोर्ट आने के बाद यह संख्या हजारों तक पहुंच सकती है।

अटैच शिक्षकों की व्यवस्था तत्काल खत्म हो

लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने हाल ही में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त संचालकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर निर्देश दिए हैं कि स्कूलों से बाहर अटैच सभी शिक्षकों की व्यवस्था तत्काल समाप्त की जाए और उन्हें उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराया जाए। निर्देश के बाद भोपाल, रीवा, जबलपुर समेत कई जिलों में ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारियों ने संबंधित शिक्षकों को जल्द स्कूल लौटने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

अटैचमेंट बचाने की कोशिश कर रहे शिक्षक

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक लंबे समय से कार्यालयों में कार्यरत कई शिक्षक अब अटैचमेंट बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल लौटने के बाद शिक्षकों को नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी और तय समय तक विद्यालय में उपस्थित रहना होगा। विभाग में लागू "जितनी ई-अटेंडेंस, उतना वेतन" व्यवस्था के तहत अनुपस्थिति की स्थिति में वेतन प्रभावित हो सकता है।

कार्यभार ग्रहण नहीं करने वालों का रुकेगा वेतन

भोपाल सहित कई जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक अपनी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे, उनका जुलाई माह का वेतन रोका जा सकता है। इसके बावजूद कई शिक्षक अब तक स्कूल नहीं लौटे हैं।

वरिष्ठ अधिकारी नहीं दिखा रहे रुचि

इस बीच विभागीय सूत्रों का दावा है कि कुछ जिलों में प्रशासनिक स्तर पर अटैचमेंट समाप्त करने में सहयोग नहीं मिल रहा है। आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी और कलेक्टर ऐसे शिक्षकों को वापस भेजने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यहां तक कि कुछ अधिकारियों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बनाने की भी चर्चा है। हालांकि विभाग ने किसी अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग कर रहे थे शिक्षक

लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह का कहना है कि लंबे समय से शिक्षक संगठन गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग कर रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि शिक्षकों को उनके मूल दायित्व यानी पढ़ाई-लिखाई के कार्य में वापस लगाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इन कार्यों में लगाए गए थे शिक्षक

गौरतलब है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना, बूथ लेवल अधिकारी (BLO), सुपरवाइजर और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी लगाए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग अब ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से विद्यालयों में वापस भेजने की तैयारी कर रहा है।

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