MP MBBS Intern Protest : मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी है। भोपाल, इंदौर समेत प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में सुबह नियमित ओपीडी बंद रहेगी। आंदोलन का असर अस्पतालों से लेकर सड़कों तक दिखाई दे रहा है।
भोपाल में इंटर्न डॉक्टर कमला पार्क के पास सड़क पर डटे हैं, जबकि हमीदिया अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इस बीच सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है।
MBBS इंटर्न के आंदोलन के चलते हमीदिया अस्पताल में मंगलवार को सामान्य दिनों की करीब 3000 मरीजों वाली ओपीडी घटकर 400-500 तक रह गई। 40 से ज्यादा प्रस्तावित ऑपरेशन भी नहीं हो सके। बाहर से इलाज के लिए आए कई मरीज घंटों इंतजार के बाद वापस लौट गए। इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण एंबुलेंस को भी घूमकर अस्पताल पहुंचना पड़ा।
कमला पार्क के पास डॉक्टरों के सड़क पर बैठने और सीएम हाउस की ओर बैरिकेडिंग के कारण रेतघाट-पॉलिटेक्निक रोड पर ट्रैफिक प्रभावित रहा। सोमवार शाम करीब 5 बजे बिगड़ी व्यवस्था मंगलवार रात तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी। सुबह फिर जाम की स्थिति बनी और पुलिस को वाहनों के लिए डायवर्जन करना पड़ा। एक लेन से दोनों तरफ के वाहन निकाले गए, जिससे आम लोगों को कई घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने 9 सितंबर को भी नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी के बहिष्कार का ऐलान किया है। इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में GMC भोपाल के सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन समेत अन्य डॉक्टर संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं को बहिष्कार से बाहर रखा गया है।
डॉक्टरों का आंदोलन सिर्फ स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं है। सोमवार को प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी डॉक्टरों में नाराजगी है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि स्टाइपेंड पर ठोस फैसला और पुलिस कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मंगलवार को वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें स्टाइपेंड के साथ वॉटर कैनन और लाठीचार्ज के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री से लगातार चर्चा हो रही है और उनके लौटने के बाद स्टाइपेंड पर फैसला होगा। हालांकि, इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
प्रदर्शन के दौरान वॉटर कैनन के इस्तेमाल और डॉक्टरों के घायल होने के मामले में निष्पक्ष जांच शुरू हो गई है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने डीसीपी जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी बनाया है। जांच अधिकारी सभी पक्षों को सुनकर रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपेंगे। अब डॉक्टरों की नजर सरकार के फैसले और जांच रिपोर्ट पर है।