Arvind Kejriwal On Election Commission : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग की है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि पिछले एक साल में आयोग के सभी फैसले पूर्ण सहमति से लिए गए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने मध्य प्रदेश को भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे से जोड़ते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनके मुताबिक देशभर में SIR के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि पिछले तीन वर्षों में मतदाता सूची में किए गए बदलावों को वापस लिया जाए और पुरानी मतदाता सूचियां बहाल की जाएं।
केजरीवाल ने दावा किया कि देशभर में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। उन्होंने मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर चुनाव आयोग से सार्वजनिक तौर पर जवाब देने की मांग की। उनके मुताबिक यह मामला केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का संचालन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कथित तौर पर उठाई गई आपत्तियों का भी हवाला दिया। केजरीवाल के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने कई बार आयोग की मंजूरी के बिना आदेश और संचार जारी किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे।
केजरीवाल ने एक मीडिया हाउस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने, वोटर लिस्ट से जुड़े IT सिस्टम और शक्तियों के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के हवाले से केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों का नियंत्रण स्थानीय ERO स्तर से केंद्रीय स्तर और दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के अधिकारियों की ओर स्थानांतरित किया गया। उन्होंने ECINet सॉफ्टवेयर का उदाहरण देते हुए गोवा के 97 मतदाताओं का जिक्र किया, जिन्हें स्थानीय ERO ने पात्र माना था, लेकिन सॉफ्टवेयर में उनके फैसले दर्ज नहीं हो सके।
Form-6 में SIR से जुड़े सवाल जोड़े जाने को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का रिपोर्ट के हवाले से जिक्र किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इसे कथित तौर पर 'अवैध' और 'अनधिकृत' बताया गया था। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि संस्थागत deliberation में अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं और पिछले एक साल में आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। केजरीवाल ने मांग की है कि यदि ऐसी आपत्तियां और पत्र मौजूद हैं तो आयोग को उनका सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।