राहुल गांधी के बयान पर क्या बोली भोपाल की जनता (नवभारत डिजाइन इमेज)
भोपाल

भोपाल: धरे के धरे रह गए राहुल गांधी के जातीय दावे, VIDEO में देखें सच्चाई; चायवालों के दिल में नहीं है भेदभाव

Navbharat Live Exclusive: राहुल गांधी के 'चाय की दुकान पर जातिगत भेदभाव' वाले बयान पर भोपाल में छिड़ी बहस, चाय विक्रेताओं और ग्राहकों ने जताई असहमति।

सजल रघुवंशी

Public Opinion On Rahul Gandhi Statement: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर चाय की दुकानों में दलितों और अन्य लोगों के लिए अलग-अलग कपों का इस्तेमाल किया जाता है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए उठाया था। उनके बयान के बाद अब इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी के साथ-साथ आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

इसी मुद्दे को लेकर भोपाल की चाय की टपरियों पर दुकानदारों और ग्राहकों से बातचीत की गई। अधिकांश लोगों ने राहुल गांधी के बयान से असहमति जताते हुए कहा कि चाय की दुकान पर किसी की जाति पूछकर चाय नहीं दी जाती। लोगों का कहना है कि उनके अनुभव में ऐसी बातें केवल समाज में बेवजह की बहस और विभाजन पैदा करती हैं।

किसी के भी साथ नहीं होता भेदभाव- दुकानदार

चाय दुकानदारों ने कहा कि उनके लिए दुकान पर आने वाला हर व्यक्ति ग्राहक है और किसी की जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार करने का सवाल ही नहीं उठता। वहीं ग्राहकों का कहना था कि आज के दौर में इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक मंचों से उठाकर समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

"अपनी राजनीति साधने के लिए दिए जाते हैं ऐसे बयान"

भोपाल के लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेता अक्सर अपनी राजनीति साधने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस तरह के बयान देते हैं। उनका मानना है कि आम जनता रोजमर्रा की जिंदगी में एक-दूसरे के साथ मिलजुलकर रहती है, लेकिन राजनीतिक बयान कई बार उन मुद्दों को बड़ा बना देते हैं, जिनसे समाज में वर्गीकरण और आपसी दूरी बढ़ सकती है।

"समाज को जाति के नाम पर बांटने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए"

भोपाल में बातचीत के दौरान लोगों ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन समाज को जाति के नाम पर बांटने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए। लोगों का कहना है कि नेताओं को ऐसे मुद्दों पर बयान देते समय यह भी सोचना चाहिए कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का असर सामाजिक सौहार्द पर पड़ सकता है। राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है और अलग-अलग दलों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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