Gen Alpha School Bachao Movement: राजधानी भोपाल का नीलम पार्क रविवार को स्कूली बच्चों, अभिभावकों और गार्जियनों के प्रदर्शन का केंद्र बन गया। सरकारी स्कूलों को बंद करने और अन्य स्कूलों में मर्ज किए जाने की नीति के विरोध में बड़ी संख्या में लोग यहां एकत्रित हुए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि स्कूलों के भविष्य से जुड़े फैसले लेने से पहले विद्यार्थियों और अभिभावकों की राय को भी महत्व दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और स्कूलों को बचाने की अपील की।
प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में जेन-अल्फा पीढ़ी के बच्चे भी शामिल हुए। बच्चों ने पोस्टर और नारों के माध्यम से सरकारी स्कूलों को बंद करने अथवा उनके विलय का विरोध किया। उनका कहना था कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि उनके भविष्य और सपनों की नींव हैं। प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने मांग की कि उनके स्कूलों को बंद करने या दूसरे स्कूलों में मिलाने का निर्णय लेने से पहले उनसे और उनके अभिभावकों से चर्चा की जाए।
अभिभावकों और गार्जियनों ने चिंता जताई कि स्कूलों के विलय से बच्चों के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। उनका कहना है कि यदि स्कूल दूर स्थित किसी अन्य संस्थान में मर्ज किए जाते हैं तो विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसके अलावा प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षकों की उपलब्धता, कक्षाओं के संचालन और वोकेशनल कोर्स जैसी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन सकती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इन मुद्दों पर स्पष्ट नीति और जानकारी के बिना ऐसे फैसले छात्रों के हित में नहीं हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर ऐसे कदम नहीं उठाए जाने चाहिए, जिनका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़े। उनका आरोप है कि सरकार ने इस विषय पर प्रभावित परिवारों से पर्याप्त संवाद नहीं किया है। नीलम पार्क में हुए प्रदर्शन के जरिए बच्चों और अभिभावकों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा और प्रदेश स्तर पर भी विरोध दर्ज कराया जाएगा।