Bhopal Master Plan : भोपाल के लंबे समय से अटके मास्टर प्लान को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को लेकर शहर के कारोबारियों और आम लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसी मुद्दे पर चैंबर ऑफ कॉमर्स के गोविंद गोयल ने नवभारत से बातचीत में मास्टर प्लान की जरूरत, शहर के भविष्य और व्यापारियों की चिंताओं को लेकर अपनी बात रखी।
गोविंद गोयल ने कहा कि भोपाल की जनता ने मास्टर प्लान के लिए लंबे समय तक इंतजार किया है। अब जब मास्टर प्लान आने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है तो इसे सिर्फ जमीन के उपयोग और निर्माण से जुड़े नियमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसमें भोपाल की जनता की सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि शहर के विकास को व्यवस्थित दिशा दी जा सके।
गोयल के मुताबिक भोपाल लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले वर्षों में शहर की आबादी के साथ ट्रैफिक, बाजार और आवासीय जरूरतें भी बढ़ेंगी। ऐसे में मास्टर प्लान व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से मास्टर प्लान का इंतजार कर रहे शहर को ऐसी योजना की जरूरत है, जिससे विकास के साथ आम लोगों के सामने अनावश्यक परेशानियां भी न खड़ी हों।
बातचीत के दौरान गोविंद गोयल ने भोपाल सीलिंग कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया। उनका कहना था कि मास्टर प्लान से जुड़े विवादों और व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के बीच आगे की व्यवस्था स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि व्यापारियों, संपत्ति मालिकों और आम लोगों को नियमों को लेकर स्पष्टता मिल सके।
भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर कारोबारियों की नजर इस बात पर है कि शहर में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए क्या प्रावधान किए जाते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां लंबे समय से दुकानें और दूसरे व्यवसाय संचालित हो रहे हैं, वहां नए नियमों का सीधा असर कारोबारियों पर पड़ सकता है। गोविंद गोयल ने कहा कि नए मास्टर प्लान में शहर की मौजूदा जरूरतों के साथ आने वाले वर्षों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार नए ड्राफ्ट में जनता और व्यापारियों की चिंताओं को कितना स्थान देती है। लंबे इंतजार के बाद सामने आने वाला मास्टर प्लान भोपाल के आवासीय, व्यावसायिक और परिवहन ढांचे को किस दिशा में ले जाता है, यह उसके प्रावधानों के सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।