भोपाल में दूसरे दिन भी जारी इंटर्न डॉक्टर्स का प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
भोपाल

भोपाल: लगातार दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी, इंटर्न डॉक्टर्स ने रोकी स्कूल वैन! भारी ट्रैफिक से लोग परेशान

Intern Doctors Protest Bhopal: मध्य प्रदेश में दूसरे दिन भी इंटर्न डॉक्टरों का उग्र प्रदर्शन, कमला पार्क पर चक्काजाम कर सड़क पर खाया खाना। प्रदर्शनकारियों ने रोकी स्कूल वैन।

शिवम दत्त तिवारी, सजल रघुवंशी

School Van Stopped By Intern Doctors: मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का धरना-प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। डॉक्टर मौजूदा ₹14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन के चलते भोपाल के हमीदिया अस्पताल, इंदौर के एमवाय अस्पताल, खंडवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल समेत कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। फिलहाल कई जगहों पर सीनियर डॉक्टर ही मरीजों का इलाज संभाल रहे हैं। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर कमला पार्क के पास चक्काजाम कर सड़क पर धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने सड़क पर ही दोपहर का भोजन किया। उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

सड़क बंद होने से शहरवासियों को हो रही परेशानी

बता दें कि, इंटर्न डॉक्टर्स का यह प्रोटेस्ट काफी तेज हो गया है। जिसके चलते सड़क पर भारी जाम की स्थिति देखने को मिल रही है। बता दें कि, इस वजह से शहरवासियों को काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, इंटर्न डॉक्टर्स ने एक स्कूल वैन को भी बीच में रोक लिया, जिसके चलते काफी देर बीच सड़क पर गर्मी में बच्चे परेशान होते रहे।

प्रदर्शनकारियों ने स्कूल वैन को रोका

"जब तक पूरी नहीं होंगी मांगे जारी रहेगा प्रदर्शन"

गौरतलब है कि, इंटर्न डॉक्टर्स का यह साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करेगी तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। बता दें कि, इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। मंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के वापस लौटने के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा करने का आश्वासन दिया। हालांकि, इंटर्न डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि वह केवल आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।

यह हैं इंटर्न डॉक्टर्स की मुख्य मांगे

इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि स्टाइपेंड को 14,337 रुपये से बढ़ा कर 30 हजार रुपये प्रति माह किया जाना चाहिए, साथ ही स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश जारी किया जाए। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी उचित कार्रवाई की जाए। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं होता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। आंदोलन के कारण प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ओपीडी सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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