One Horned Rhino Facts: हर साल 22 सितंबर को World Rhino Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया में बचे हुए गैंडों की पांच प्रजातियों का संरक्षण करना है और उनके सामने आने वाले खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इसकी शुरुआत 2011 में हुई थी।
भारत के लिए यह दिन इसलिए खास है, क्योंकि भारत एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण का बड़ा केंद्र है। इसका वैज्ञानिक नाम- Rhinoceros unicornis है और यह मुख्य रूप से भारत और नेपाल में पाया जाता है। 2025 की इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि, मार्च 2025 तक दुनिया भर में इस प्रजाति के करीब 4,075 गैंडे थे, जिनमें 3,323 भारत में और 752 नेपाल में थे।
ग्रेटर वन हॉर्न्ड राइनो की पहचान इसका एक बड़ा सींग है। इसका शरीर मोटा, धूसर-भूरी त्वचा से ढका होता है, जिससे यह कवच जैसा दिखाई देता है। इसी वजह से इसका वैज्ञानिक नाम-unicornis रखा गया, जिसका मतलब है एक सींग वाला।
भारत में एक सींग वाले गैंडे की संख्या 4000 से अधिक है। 20वीं सदी की शुरुआत तक शिकार और दूसरे कारणों से इनकी संख्या महज 200 थी। सख्त संरक्षण और बेहतर वन्यजीव प्रबंधन के बाद इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई।
भारत में मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश एक सींग वाले गौंडे पाए जाते हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, कभी यह प्रजाति उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से में फैली हुई थी, लेकिन अब इनका नेचुरल होम बहुत सिमटता जा रहा है।
असम का काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा संरक्षण क्षेत्र है। मार्च 2022 की गणना में यहां 2,613 गैंडे दर्ज किए गए थे। काजीरंगा को 1985 में UNESCO ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का भी दर्जा दिया है।
बता दें कि एक सींग वाले गैंडे मुख्य रूप से शाकाहारी और चरने वाला जीव है। घास इसका प्रमुख भोजन है, लेकिन यह पत्तियां, झाड़ियों की टहनियां, फल और जलीय पौधे भी खाता है। गैंडे पानी में जाकर जलीय वनस्पतियां भी खाना पसंद करते हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस प्रजाति में मादा गैंडे का गर्भकाल काफी लंबा होता है- लगभग 15 से 16 महीने। आमतौर पर मादा एक बच्चे को जन्म देती है और दो बच्चों के बीच अंतर लगभग 2 से 3 साल का होता है।
2022 में भारत और नेपाल में इस प्रजाति की कुल संख्या करीब 4,014 थी, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 4,075 हो गई। भारत में 2024 में इनकी संख्या 3,323 बताई गई। संरक्षण के साथ-साथ कानून लागू करना, अवैध शिकार रोकना और नए आवास तैयार करना इनकी बढ़ती संख्या का कारण है।