महिला दिवस और पर्पल कलर का क्या है कनेक्शन (सोशल मीडिया) 
लाइफस्टाइल

8 मार्च को मनाया जाएगा 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस', जानें क्यों पहनते हैं इस दिन बैंगनी रंग के कपड़े

इस दिन को सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और कई दूसरे क्षेत्रों में अपना अहम योगदान देने वाले महिलाओं को सम्मानित किया जाता है।

दीपिका पाल

सीमा कुमारी

नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: जैसा कि सभी जानते हैं कि 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' (International Women's Day 2024) दुनियाभर में महिलाओं को सम्मान, समानता, अधिकार और उनके राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक सरोकार पर बल देने के लिए मनाया जाता है।

महिलाओं के हौसलों को ताकत देने और समाज में फैले लिंग भेद को दूर करने में इस दिन का काफी महत्व है। लेकिन, हर साल 8 मार्च को दुनियाभर में सेलिब्रेट किए जाने वाले इंटरनेशनल वुमन्स डे पर खासतौर से पर्पल कलर (Purple Color) पहना जाता है, आइए जानें ऐसा क्यों। पर्पल ही नहीं, दो और रंग भी इसमें शामिल हैं।

जानिए किन रंगों का क्या हैं महत्व

बैंगनी रंग (Purple Color)

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैंगनी रंग न्याय और गरिमा का प्रतीक है। महिला दिवस पर बैंगनी रंग पहनना दुनियाभर की महिलाओं के साथ एकजुटता का भाव दर्शाता है।

हरा रंग

इस खास दिन को मनाने से जुड़ा हरा रंग पॉजिटिविटी और उम्मीद की पहचान है। हरे रंग को खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है। हरा रंग हीलिंग से भी जुड़ा हुआ है। हरा समानता और संबल को भी दर्शाने वाला रंग है। महिला दिवस के अभियान से जुड़ा हरा रंग असल में महिलाओं के ऊर्जावान व्यक्तित्व से भी जुड़ा हुआ है।

शुद्धता और शांति को दर्शाता सफेद रंग

सफेद रंग शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। सफेद रंग को सफल शुरुआत का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। साथ ही यह रंग सुकून और दृढ़ता को भी दर्शाता है। दुनियाभर में शांति और सहजता बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका बहुत अहम मानी जाती है, इस वजह से ये रंग भी इस उत्सव का खास हिस्सा है।

महिला पर किस रंग का क्या है मतलब (सोशल मीडिया)

कैसे हुई इसकी शुरुआत

महिला अधिकार कार्यकर्ता रहीं क्लारा जेटकिन ने 1910 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बुनियाद रखी थी। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में कामकाजी महिलाओं के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने इसका सुझाव दिया था। कोपेनहेगन में हुए सम्मेलन में 17 देशों से 100 महिलाएं शामिल हुई थीं और उन्होंने क्लारा जेटकिन के इस सुझाव पर अपनी सहमति दी थी। जिसके बाद साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था।

इस दिन को सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और कई दूसरे क्षेत्रों में अपना अहम योगदान देने वाले महिलाओं को सम्मानित किया जाता है।

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