Relationship Tips: एक खुशहाल रिश्ते की बुनियाद आपसी समझ और भरोसे पर टिकी होती है लेकिन समय के साथ अक्सर कपल्स के बीच संवाद की कमी और छोटी-छोटी अनबन बड़ी शिकायतों का रूप ले लेती हैं। डिजिटल युग और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर पार्टनर की उन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं जो उनके लिए बेहद मायने रखती हैं। मनोवैज्ञानिकों और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि अधिकांश रिश्तों में खटास की वजह कोई बड़ी लड़ाई नहीं बल्कि वो आम शिकायतें होती हैं जो धीरे-धीरे रिश्ते को अंदर से खोखला कर देती हैं।
रिश्ते की शुरुआत में घंटों बातें करने वाले कपल्स अक्सर शादी या कुछ सालों बाद एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते। काम का दबाव और मोबाइल फोन की लत इस शिकायत को और बढ़ा देती है। जब पार्टनर को लगने लगता है कि वह आपकी प्राथमिकता नहीं है तो भावनात्मक दूरियां बढ़ने लगती हैं। दिन भर में कम से कम 15-20 मिनट का नो-गैजेट क्वालिटी टाइम इस शिकायत को दूर कर सकता है।
हर इंसान चाहता है कि उसके प्रयासों को सराहा जाए। अक्सर पार्टनर को लगता है कि वे घर या ऑफिस के लिए जो भी कर रहे हैं उसे ग्रैंटिड ले लिया गया है। छोटी-छोटी चीजों के लिए धन्यवाद कहना या उनके लुक की तारीफ करना रिश्ते में नया उत्साह भर देता है। सराहना की कमी पार्टनर के मन में हीन भावना पैदा करती है।
आज के दौर में जब दोनों पार्टनर कामकाजी हैं तब घर की पूरी जिम्मेदारी किसी एक पर डालना विवाद की सबसे बड़ी जड़ है। सारा काम मुझे ही क्यों करना पड़ता है? यह शिकायत अक्सर महिलाओं की ओर से आती है। घर के कामों में बराबरी की हिस्सेदारी न केवल बोझ कम करती है बल्कि पार्टनर के प्रति सम्मान भी दर्शाती है।
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सोशल मीडिया के दौर में लोग दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर अपने पार्टनर की तुलना करने लगते हैं। उनका पार्टनर तो उन्हें यहां ले गया या वो अपनी पत्नी का कितना ख्याल रखता है ऐसी तुलना रिश्ते के लिए जहर समान है। हर व्यक्ति और हर रिश्ता अलग होता है। तुलना करने के बजाय अपनी खूबियों पर ध्यान देना जरूरी है।
रिश्ते का मतलब सिर्फ साथ रहना नहीं बल्कि मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का संबल बनना है। अक्सर कपल्स की शिकायत होती है कि जब वे परेशान होते हैं तो पार्टनर उनकी बात सुनने के बजाय सलाह देने लगता है या उसे नजरअंदाज कर देता है। पार्टनर को बस एक सुनने वाले कान और सहारे की जरूरत होती है।
इन शिकायतों को दूर करने का एकमात्र तरीका स्वस्थ संवाद है। अपने पार्टनर से खुलकर बात करें और उनकी बात को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनें। याद रखें छोटी-छोटी कोशिशें ही किसी भी रिश्ते को टूटने से बचा सकती हैं और उसमें फिर से वही पुरानी मिठास घोल सकती हैं।