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जानिए कब से शुरू हुआ रक्षाबंधन का त्योहार, कैसे जुड़ी है इसकी श्रीकृष्ण से डोर

नवभारत डेस्क

सीमा कुमारी

भाई बहन के प्रेम का प्रतीक 'रक्षाबंधन' (Raksha Bandhan) का पावन पर्व हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।  भाई अपनी बहन की जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर एक रक्षा सूत्र बांधती हैं, मिठाई खिलाती हैं और भाई की आरती उतारती है। इसके बाद अपनी बहन को कुछ तोहफा देकर जिन्दगी भर रक्षा करने का वचन देता है।

सनातन धर्म के पवित्र त्योहारों में से एक और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक राखी का त्यौहार ढेर सारी खुशियां लेकर आता है। रक्षाबंधन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है रक्षा + बंधन अथार्त् रक्षा का बंधन, यानी इस रक्षा सुत्र को बंध जाने के बाद एक भाई अपनी बहन की रक्षा करने को बाध्य हो जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, रक्षाबंधन त्योहार को मनाने की शुरुआत बहुत पौराणिक है। ऐसा कहा जाता है कि इस त्योहार को देवी-देवताओं के समय से मनाई जा रहा है। आइए जानें आखिर यह पवित्र त्योहार क्यों मनाया जाता है?

श्री कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

महाभारत के दौरान एक बार राजसूय यज्ञ के लिए पांडवों ने भगवान कृष्ण को आमंत्रित किया। उस यज्ञ में श्री कृष्ण के चचेरे भाई शिशुपाल भी थे। उस दौरान शिशुपाल ने भगवान कृष्ण का बहुत अपमान किया। जब पानी सिर के ऊपर चला गया तो भगवान कृष्ण को क्रोध आ गया। क्रोध में भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल पर अपना सुदर्शन चक्र छोड़ दिया लेकिन शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र भगवान श्री कृष्ण के पास लौटा तो उनकी तर्जनी उंगली में गहरा घाव हो गया। यह देख कर द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर भगवान कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस स्नेह को देखकर भगवान कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और द्रौपदी को वचन दिया कि वे हर स्थिति में हमेशा उनके साथ रहेंगे और हमेशा उनकी रक्षा करेंगे।

भगवान इंद्र से जुड़ी है ये कथा

रक्षाबंधन को मनाए जाने के पीछे एक और कहानी देवताओं के राजा इंद्र और असुरों के राजा बलि से जुड़ी है। भविष्य पुराण के मुताबिक, असुरों के राजा बलि ने जब देवताओं पर हमला किया तो इससे इंद्र की पत्नी सची काफी व्याकुल हो गईं थीं। इस युद्ध में देवताओं की जीत के लिए तब सची ने भगवान विष्णु से मदद मांगी तो उन्होंने सची को एक धागा दिया और कहा कि इसे अपने पति की कलाई पर बांधे जिससे उनकी जीत होगी। सची ने ऐसा ही किया तो उस युद्ध में इंद्र की जीत हुई थी। यही वजह है कि पुराने समय में युद्ध में जाने से पहले बहनें और पत्नियां अपने भाइयों और पति को रक्षा सूत्र बांधती हैं।

बहनें लेती हैं भाइयों से रक्षा का वचन

रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनें अपने भाइयों की लम्बी आयु की कामना के साथ उनके कुशल स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं। इसके साथ ही भाई अपनी बहन को आजीवन रक्षा का वचन भी देता है।  

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