मल्टीपल मायलोमा की बीमारी (सौ.डिजाइन फोटो) 
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जानें क्या होती हैं मल्‍टीपल मायलोमा बीमारी, इससे बिहार की स्वर कोकिला शारदा सिन्हा का हुआ निधन

दिवंगत गायिका शारदा सिन्हा का निधन एक खतरनाक बीमारी मल्‍टीपल मायलोमा से हुआ है। इसके बारे शायद कम ही लोग जानते है। चलिए जानते हैं इस बीमारी के बारे में क्या इसका इलाज संभंव है। बता दें की शारदा सिन्हा 72 साल की थीं और पिछले कुछ सालों से बीमार चल रही थी।

दीपिका पाल

Multiple myeloma disease: छठ पर्व चल रहा है इस दौरान दुखद खबर मिली जिसमें बिहार की शान कहे जाने वाली स्वर कोकिका शारदा सिन्हा का निधन हो गया है। छठ पर्व के दौरान उनके गाने आज भी एक अलग ही कनेक्शन जोड़ते है। दिवंगत गायिका शारदा सिन्हा का निधन एक खतरनाक बीमारी मल्‍टीपल मायलोमा से हुआ है। इसके बारे शायद कम ही लोग जानते है। चलिए जानते हैं इस बीमारी के बारे में क्या इसका इलाज संभंव है। बता दें की शारदा सिन्हा 72 साल की थीं और पिछले कुछ सालों से बीमार चल रही थी। कल रात 5 नवंबर वह जिंदगी की जंग हार गईं। छठ पर्व के दौरान उनका जाना कई प्रशंसकों को दुखी कर गया है।

क्या होती मल्टीपल मायलोमा की बीमारी

यहां पर इस बीमारी को बताते चलें तो, यह एक तरह से रक्त कैंसर है जो प्लाज्मा कोशिकाओं से शुरू होता है। प्लाज्मा कोशिकाएं सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC) होती हैं, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनती हैं। मल्टीपल मायलोमा में यह कोशिकाएं बोन मैरो यानी की हड्डी के अंदर स्थित मांसपेशियों के टिशु में बहुत तेजी से बढ़ने लगती है। इससे हड्डियों में ट्यूमर बन सकते हैं और रक्त में हानिकारक प्रोटीन छोड़ने लगते हैं। जब प्लाज्मा कोशिकाएं ज्यादा बढ़ती है तो यह हेल्दी रक्त कोशिकाओं को दबा देती हैं जिससे शरीर का काम सही तरीके से नहीं हो पता है।

कई बार बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि, बाकी शरीर के अंग जैसे गुर्दे को भी नुकसान हो सकता है।

किन कारणों से होती है बीमारी

यहां पर इस बीमारी के लक्षण आम नहीं होते है जब समस्या बढ़ती है तो इसके लक्षण गंभीर स्थिति में नजर आते है। यह जीन में बदलाव, कुछ केमिकल से संपर्क और कमजोर इम्यून सिस्टम से जुड़ी हो सकती है। इसके जोखिम कारकों की बात करें तो यह अधिकतर 60 साल के बाद वाले लोगों को होता है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा यह बीमारी देखने के लिए मिलती है।

जानिए इस बीमारी का इलाज

इस बीमारी का इलाज जानते हुए चलें तो, कैंसर की तरह ही इसका ट्रीटमेंट किए जाते हैं कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, इम्यूनोथेरेपी और कुछ सपोर्टिव थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके प्रभाव को कंट्रोल किया जा सकता है।

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