सरगी में ऐसा खाना चुनें जो पेट भरा रखने के साथ शरीर को ऊर्जा भी दे।
व्रत से पहले हाइड्रेशन, पर्याप्त नींद और कैफीन की आदत पर ध्यान दें।
डायबिटीज या दूसरी बीमारियों में डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत न रखें।
Karwa Chauth Fasting Tips: करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं इसकी तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू कर देती हैं। कपड़ों, मेहंदी और पूजा की तैयारियों के बीच अपनी सेहत की तैयारी करना भी जरूरी है। खासकर जब पूरे दिन बिना पानी पिए और भोजन किए रहना हो। कुछ महिलाओं को इस दौरान सिरदर्द, चक्कर, थकान या कमजोरी महसूस होती है। लंबे समय तक पानी न पीने से डिहाइड्रेशन का जोखिम रहता है, जबकि भूखे रहने, नींद पूरी न होने और कैफीन की आदत में अचानक बदलाव से भी सिरदर्द हो सकता है।
सरगी में ऐसी चीजें शामिल करें, जो शरीर को ऊर्जा दें और कुछ समय तक पेट भरा रखने में मदद करें। सिर्फ मिठाई, तली हुई चीजें या बहुत ज्यादा मीठे पेय लेने के बजाय कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर का संतुलन बनाने की कोशिश करें।
इसके लिए अपनी पसंद के अनुसार रोटी, दलिया या ओट्स के साथ दही, दूध, पनीर या अन्य प्रोटीन वाला भोजन ले सकती हैं। फल भी अच्छा विकल्प हैं। बहुत नमकीन खाना प्यास बढ़ा सकता है। इसलिए सरगी में जरूरत से ज्यादा नमक और तली हुई चीजें खाने से बचें।
निर्जला व्रत में दिनभर पानी नहीं पिया जाता, इसलिए व्रत शुरू होने से पहले शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना महत्वपूर्ण है। व्रत से पहले के दिन में नियमित अंतराल पर पानी पिएं और सरगी के समय भी पानी पीना न भूलें। बेहतर है कि दिनभर सामान्य रूप से पानी पीते रहें।
ध्यान रखें कि पहले से पर्याप्त पानी पी लेने के बावजूद निर्जला व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसलिए प्यास, चक्कर या असामान्य कमजोरी जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें।
अगर आप रोज कई कप चाय या कॉफी पीती हैं, तो व्रत वाले दिन अचानक कैफीन बंद करने से कुछ लोगों को सिरदर्द हो सकता है। ऐसा कैफीन की कमी के कारण भी होता है। इसलिए अगर आप चाय-कॉफी कम करना चाहती हैं, तो व्रत से कुछ दिन पहले धीरे-धीरे इसकी मात्रा कम कर सकती हैं। इससे अचानक बदलाव का असर कम होगा।
करवा चौथ से पहले मेहंदी, खरीदारी, घर के काम और पूजा की तैयारियों के कारण देर रात तक जागना पड़ सकता है। लेकिन नींद की कमी से थकान और सिरदर्द बढ़ता है। इसलिए कोशिश करें कि व्रत से पहले की रात पर्याप्त नींद लें।
जहां तक संभव हो, जरूरी काम पहले निपटा लें और सुबह उठने के समय के हिसाब से सोने का समय तय करें। अगर सरगी के लिए जल्दी उठना है, तो देर रात तक जागने से बचें। पर्याप्त नींद शरीर को आराम देने में मदद करती है, हालांकि इससे सिरदर्द या चक्कर आने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।
व्रत के दौरान सामान्य दिनचर्या के सभी काम करना मुश्किल हो सकता है। खासकर गर्म मौसम, धूप या ज्यादा शारीरिक मेहनत से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए पूजा और दूसरे जरूरी कामों की योजना पहले से बना लें। जहां संभव हो, भारी काम परिवार के सदस्यों के साथ बांटें। लंबे समय तक धूप में खड़े रहने, कठिन व्यायाम करने या जरूरत से ज्यादा भागदौड़ से बचें। थकान महसूस हो तो आराम करें।
गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान भी व्रत रखने का फैसला अपनी सेहत और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही करें।