भारतीय गहने फोटो.सोशल मीडिया
लाइफस्टाइल

Indian Ornaments: नथ-पायल जैसे आभूषणों का सिर्फ श्रृंगार से नहीं, परंपरा और पहचान से भी है रिश्ता

Indian Jewellery: नथ, पायल और बिछिया सिर्फ भारतीय महिलाओं के श्रृंगार का हिस्सा नहीं हैं। इनसे सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएं भी जुड़ी है।

रीता राय सागर

Traditional Indian Ornaments: भारतीय महिलाओं के श्रृंगार में गहनों की जगह हमेशा से बेहद खास रही है। नाक की नथ, पैरों की पायल और बिछिया जैसे गहने देखने में खूबसूरत लगते हैं, उनके साथ कई पुरानी परंपराएं जुड़ी हैं। अलग-अलग राज्यों में इनके डिजाइन और पहनने का तरीका बदलता रहा है, लेकिन इन गहनों का सांस्कृतिक महत्व हमेशा से रहा है।

समय के साथ महिलाओं का ड्रेसिंग सेंस और लाइफस्टाइल बदल गया है। इन गहनों को सिर्फ शादी या किसी खास मौके पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के फैशन का हिस्सा बनाकर भी पहना जाता है।

नथ खूबसूरती नहीं, परंपरा की पहचान

भारतीय श्रृंगार में नथ का अपना अलग स्थान है। खासकर शादी-ब्याह और दूसरे शुभ मौकों पर दुल्हन की नथ उसके पूरे लुक का अहम हिस्सा होती है। अलग-अलग राज्यों में नथ के आकार, डिजाइन और पहनने का तरीका अलग-अलग है। हर मौके के लिए अलग प्रकार की नथ है। नाक छेदने को आयुर्वेद से जोड़ा जाता है। आज महिलाएं नथ को अपनी सांस्कृतिक जड़ों के साथ-साथ फैशन स्टेटमेंट के तौर पर भी पहनती हैं।

पायल की छनक में छिपी है पुरानी परंपरा

चांदी की पायल भारतीय महिलाओं के सबसे पहचाने जाने वाले आभूषणों में से एक है। इसकी हल्की-सी छनक कभी घर में किसी के आने का संकेत मानी जाती थी। पायल को पैरों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ स्त्री के श्रृंगार से जोड़ा गया है।

भारतीय परंपरा में आमतौर पर पैरों में चांदी के गहने पहनने की प्रथा रही है। पायल की हल्की आवाज और डिजाइन आज भी ट्रेडिशनल कपड़ों के साथ खूब पसंद किए जाते हैं। पायल को शरीर में रक्त संचार से भी जोड़ा जाता है।

बिछिया शादीशुदा की खास पहचान

पैर की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया को भारतीय समाज में लंबे समय से विवाह से जोड़ा जाता है। कई समुदायों में शादी के दौरान दुल्हन को बिछिया पहनाने की रस्म होती है। इसे वैवाहिक जीवन, जिम्मेदारी और नए रिश्ते की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

चांदी की बिछिया को शरीर के कुछ खास बिंदुओं यानी प्रेशर प्वाइंट और महिलाओं के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है। आज भी कई महिलाओं के लिए इसे शादीशुदा होने की पारंपरिक पहचान माना जाता है, जबकि कुछ महिलाएं इसे सिर्फ पसंद और फैशन के लिए चुनती हैं।

गहने और विज्ञान अलग-अलग

नथ, पायल और बिछिया से जुड़ी कई बातें पीढ़ियों से परिवारों में सुनी जाती हैं। इनमें रीप्रोडक्टिव हेल्थ, रक्त संचार या शरीर के खास हिस्सों पर दबाव पड़ने से मिलने वाले स्वास्थय लाभ शामिल है।

आज की महिलाओं के लिए भी क्यों खास हैं ये गहने?

आज नथ, पायल और बिछिया का इस्तेमाल सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं है। मिनिमल नोज पिन, पतली पायल और साधारण बिछिया को महिलाएं साड़ी, सूट ही नहीं, बल्कि कई बार वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ भी पहनती हैं।

फैशन ट्रेंड्स और सोशल मीडिया ने भी इन पारंपरिक गहनों को नया अंदाज दिया है। अब भारी-भरकम डिजाइन की जगह हल्के और मिनिमल डिजाइन भी खूब पसंद किए जाते हैं। यानी गहनों का रूप बदल गया है, लेकिन उनसे जुड़ी सांस्कृतिक पहचान अब भी वैसी ही है।

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