केक और बर्गर खाने वाले हो जाए सावधान (सौ.सोशल मीडिया) 
हेल्थ

केक-बर्गर खाने वाले शौकीन हो जाएं सावधान, नई स्टडी में हुआ इस खतरनारक बीमारी का खुलासा

अच्छी सेहत के लिए उचित खानपान की ओर ध्यान देना जरूरी होता है लेकिन लोग लाइफस्टाइल के चलते सही खानपान पर ध्यान नहीं दे पाते हैं इसका नतीजा आपकी सेहत पर पड़ता है। केक-बर्गर खाने वाले को सेहत के प्रति सजग रहने की जरूरत होती हैं जो उसे उसके लिए कई बड़ी और गंभीर बीमारी के खतरे को बढ़ा देता है।

दीपिका पाल

हेल्दी लाइफस्टाइल जहां पर सेहत के लिए कई मायनों में जरूरी होती हैं लेकिन कई बार भागदौड़ भरी जिंदगी में समय की कमी के चलते हर कोई अनहेल्दी फूड का सेवन करने लगते है। हालिया नई स्टडी ने बड़ा ही चौंकाने वाला खुलासा किया हैं जिसके अनुसार आपके द्वारा बड़े ही चाव से खाए जाने वाले बर्गर और केक सेहत को नुकसान पहुंचाने का काम करते है। इन फूड्स का सेवन एक गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा देता हैं चलिए समझते हैं नए अध्ययन के अनुसार ये खास फैक्ट।

जानिए क्या कहती हैं स्टडी

यहां पर हाल ही में सामने आए नए शोध के अध्ययन के अनुसार खुलासा हुआ है कि, जो केक और बर्गर जैसे अनहेल्दी फूड का सेवन अत्यधिक मात्रा में करते हैं इनमें शामिल सैचुरेटेड फैट वाली डाइट दिल की बीमारी के खतरे को बढ़ाने में जिम्मेदार होती है। इस शोध में लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया. एक समूह को सैचुरेटेड फैट वाला आहार दिया गया, जिसमें केक, बर्गर और अन्य जंक फूड शामिल थे। दूसरे समूह को कम फैट वाला आहार दिया गया जिसमें मछली, बादाम आदि शामिल थे. 24 दिनों तक दोनों समूहों पर नजर रखी गई।

इस शोध के नतीजे जब सामने आए तो पता चला कि, दोनों ही समूहों के लोगों का वजन लगभग समान ही था, लेकिन जिन लोगों ने सैचुरेटेड फैट वाली डाइट खाया था, उनकी सेहत पर इसका बुरा असर पड़ा। इन लोगों के नसें ब्लॉक होने लगी थीं, जिससे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ गया था। वहीं, दूसरे ग्रुप के लोगों की सेहत में सुधार हुआ, उनके खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हुई और दिल की मसल्स भी मजबूत हुईं।

दिल के लिए खतरनाक होते हैं सैचुरेटेड फैट

यहां पर केक-बर्गर की बात की जाए तो, इसमें अत्यधिक मात्रा में सैचुरेटेड फैट पाया जाता हैं जो एक प्रकार का ऐसा फैट या वसा होता हैं जो मुख्य रूप से मांस, डेयरी प्रोडक्ट्स, नारियल तेल और पाम ऑयल में पाया जाता हैयह वसा आपके खून में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ा सकता है, जिससे नसें ब्लॉक हो सकती हैं और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इस फैक्ट को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता निकोला सर्निक ने अपनी स्टडी में स्पष्ट किया है।

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