रात में शांति और दिनभर के तनाव के कारण इस तरह के विचार ज्यादा महसूस होते हैं।
सोने से पहले लिखना, धीमी सांस लेना और स्क्रीन से दूरी बनाना मददगार होता है।
लगातार ओवरथिंकिंग और नींद की परेशानी होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
How To Stop Overthinking: दिनभर काम, घर की जिम्मेदारियां और भागदौड़ के बाद जब रात में आराम करने का समय मिलता है, तब कई लोगों का दिमाग और ज्यादा चलने लगता है। कभी दिनभर की गुजरी हुई बातें याद आती हैं, तो कभी भविष्य की चिंता और पुरानी गलतियों को लेकर विचार आने लगते हैं।
बिस्तर पर लेटने के बाद भी मन शांत नहीं होता और नींद आने में देर हो जाती है। इसे ओवरथिंकिंग कहा जाता है। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन अगर लगातार विचारों के कारण नींद और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।
दिन के समय सारा ध्यान काम, परिवार और दूसरी जिम्मेदारियों में बंटा रहता है। रात में बाहरी गतिविधियां कम हो जाती है, ऐसे में मन उन बातों पर लौट आता है जिन्हें दिन में सोचने का समय नहीं मिला। तनाव, भविष्य की चिंता, अनियमित नींद और सोने से पहले मोबाइल चलाने की आदत भी इस परेशानी का कारण हो सकती है।
कई बार नींद न आने की चिंता भी एक चक्र बना देती है। व्यक्ति सोचता रहता है कि उसे जल्दी सोना चाहिए, लेकिन यही दबाव उसे और बेचैन करता है।
अगर दिमाग में एक साथ कई विचार आ रहे हैं, तो उन्हें डायरी में नोट करें। कौन-सी बात परेशान कर रही है और उसके लिए कल क्या किया जा सकता है, इसे लिखें। इससे विचारों को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।
बिस्तर पर लेटकर लगातार रील्स देखना, खबरें पढ़ना या काम के मैसेज चेक करना दिमाग को सक्रिय रखता है। सोने से लगभग 30 मिनट पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं और इसकी जगह हल्की किताब पढ़ें या संगीत सुनें।
आराम से बैठें या लेट जाएं। नाक से धीरे-धीरे सांस लें और बिना जोर लगाए धीरे-धीरे छोड़ें। कुछ मिनट तक ऐसा करें। ध्यान सांस पर रखने से विचारों से थोड़ी देर के लिए ध्यान हटाने में मदद मिलती है।
रात में किसी समस्या का तुरंत समाधान निकालना जरूरी नहीं है। खुद से कहें कि इस पर कल शांत मन से विचार करेंगे। यह भी समझें कि हर विचार सच नहीं होता और हर चिंता का समाधान उसी समय मिलना जरूरी नहीं है।
हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग, किताब पढ़ना या गुनगुने पानी से नहाना जैसी आदतें स्लीप क्वालिटी को बढ़ाती है। शाम को चाय-कॉफी का सेवन भी सीमित रखें, कोशिश करें कि 6 बजे के बाद इनका सेवन न करें।
अगर रात में बार-बार काम, रिश्तों या भविष्य की चिंता सताती है, तो दिन में 10-15 मिनट का समय उन बातों पर सोचने के लिए रखें। इस दौरान देखें कि किन समस्याओं पर आप कुछ कर सकते हैं और किन बातों को छोड़ देना बेहतर है।
अगर ओवरथिंकिंग लगातार बनी रहती है, नींद बार-बार टूटती है, दिनभर थकान रहती है या चिंता के कारण काम और रिश्ते प्रभावित होने लगते हैं, तो मनोवैज्ञानिक या मेंटल हेल्थ विशेषज्ञ से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग भी मददगार हो सकती है।