Weight Training For Kids: पुरानी विचारधारा की मानी जाए, तो बच्चों का वेट उठाना सही नहीं है। बच्चों के वेट उठाने से उनकी लंबाई रुक सकती है या हड्डियों पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन अब यह सोच बदली हुई दिख रही है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सही उम्र, सही तकनीक और कुशल निगरानी में कराई गई वेट ट्रेनिंग बच्चों के लिए सुरक्षित हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चे बड़े लोगों की तरह भारी वजन उठा सकते हैं।
जब बच्चा निर्देशों को समझने और सही तकनीक अपनाने में सक्षम हो जाए, तब हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू की जा सकती है। आमतौर पर 7-8 साल की उम्र के बाद बच्चे अपनी बॉडी वेट एक्सरसाइज, रेजिस्टेंस बैंड या बहुत हल्के वजन के साथ ट्रेनिंग शुरू कर सकते हैं। इस दौरान उनका फोकस ताकत बढ़ाने से ज्यादा सही मूवमेंट सीखने पर होना चाहिए, लेकिन यह सब प्रशिक्षित जिम ट्रेनर की निगरानी में किया जाना चाहिए।
बच्चों को कभी भी भारी वजन उठाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। शुरुआत हमेशा हल्के वजन या बॉडी वेट एक्सरसाइज से करें। हर एक्सरसाइज सही तकनीक के साथ कराई जानी चाहिए और किसी प्रशिक्षित कोच या फिटनेस एक्सपर्ट की निगरानी में ही कराई जाए।
ट्रेनिंग से पहले वॉर्मअप और बाद में कूल डाउन करना भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा बच्चों के लिए सप्ताह में 2-3 दिन की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग काफी होती है, क्यों कि बच्चे दिनभर एक्टिव रहते हैं। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि शरीर को रिकवरी का समय देना भी उतना ही जरूरी है।
नहीं, बच्चों की फिटनेस में सिर्फ वेट ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि दौड़ना, कूदना, साइकिल चलाना, तैराकी और आउटडोर गेम्स भी उतना ही जरूरी है। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।