महिला वैक्सीन लगवाते हुए (सौ. फ्रीपिक) 
हेल्थ

HPV Vaccine: कैंसर से सुरक्षा या पीरियड्स में गड़बड़ी? HPV वैक्सीन लगवाने से पहले जरूर जान लें ये बातें

HPV Vaccine: एचपीवी वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हालांकि कई लोगों के मन में इसे लेकर सवाल भी उठते हैं जैसे इसके संभावित साइड इफेक्ट्स या पीरियड्स पर असर।

प्रीति शर्मा

HPV Vaccine For Women: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षा देने वाली एचपीवी (HPV) वैक्सीन आजकल चर्चा में है लेकिन इसके साथ ही एक डर भी फैल रहा है कि क्या यह पीरियड्स में गड़बड़ी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर बढ़ती चिंताओं के बीच मेडिकल एक्सपर्ट्स ने हकीकत बयां की है जिसे हर महिला के लिए जानना जरूरी है।

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इससे बचाव के लिए डॉक्टर एचपीवी वैक्सीन की सलाह देते हैं लेकिन हाल के दिनों में कई लड़कियों और महिलाओं के मन में यह सवाल उठा है कि क्या इस टीके का असर उनके पीरियड्स साइकिल पर पड़ेगा।

क्या कहता है वैज्ञानिक रिसर्च

अब तक हुए तमाम अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध स्पष्ट करते हैं कि एचपीवी वैक्सीन का पीरियड्स साइकिल पर कोई स्थायी या हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स के दौरान भी यह वैक्सीन लेना पूरी तरह सुरक्षित है। पीरियड्स शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसका वैक्सीन की प्रभावशीलता या सुरक्षा से कोई सीधा संबंध नहीं होता है।

हल्के बदलावों की असली वजह

कुछ मामलों में यह देखा गया है कि वैक्सीन लेने के बाद पीरियड्स की तारीख में एक-दो दिन का अंतर आ सकता है। हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि यह बदलाव वैक्सीन की वजह से नहीं बल्कि टीकाकरण के समय होने वाले मानसिक तनाव, थकान, नींद की कमी या डाइट में बदलाव के कारण हो सकता है। यह शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है और अगले ही महीने साइकिल अपने आप सामान्य हो जाती है।

वैक्सीन के सामान्य लक्षण

वैक्सीन लगने के बाद कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, बुखार या थकान महसूस हो सकती है। ये लक्षण इस बात का संकेत हैं कि आपका शरीर वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहा है। ये परेशानियां आमतौर पर 24 से 48 घंटों में खुद ही ठीक हो जाती हैं।

कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा सुरक्षा कवच

एचपीवी वैक्सीन का प्राथमिक उद्देश्य शरीर को उस वायरस से बचाना है जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और दुनिया भर के कैंसर विशेषज्ञ 9 से 26 वर्ष की लड़कियों के लिए इसे अनिवार्य सुरक्षा मानते हैं। कई देशों में इसे नियमित टीकाकरण का हिस्सा बनाया गया है ताकि सर्वाइकल कैंसर के खतरों को जड़ से खत्म किया जा सके।

यदि आप वैक्सीन के बाद किसी असामान्य बदलाव को लेकर चिंतित हैं तो डरे नहीं। यह आपके जीवन की सुरक्षा के लिए है। किसी भी गंभीर शंका की स्थिति में अपने गायनोकोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें।

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