Hormone Replacement Therapy: महिलाओं में तकरीबन 40 की उम्र के बाद मेनोपॉज शुरु होता है, जिसमें पीरियड्स खत्म होता है। यह प्रक्रिया सालों तक चलती है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स का स्तर कम होने लगता है।
इसकी वजह से सामान्य तौर पर हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, मूड स्विंग, नींद की समस्या और योनि में सूखापन जैसी परेशानियां होने लगती हैं। हालांकि यह हर महिला के लिए अलग हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर कुछ महिलाओं को हार्मोन रिप्लेसमेंट की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं क्या है हार्मोन रिप्लेसमेंट और इसके जोखिम।
यह एक ऐसा मेडिकल ट्रीटमेंट है, जिसमें शरीर में जब हार्मोन्स की कमी हो जाती है, तब एस्ट्रोजन और जरूरत पड़ने पर प्रोजेस्टेरोन, दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य मेनोपॉज के लक्षणों को कम करना और लाइफ स्टाइल को बेहतर बनाना है। जिन महिलाओं का गर्भाशय मौजूद होता है, उन्हें आमतौर पर एस्ट्रोजन के साथ प्रोजेस्टेरोन भी दिया जाता है, जबकि जिनका गर्भाशय निकल चुका होता है, उन्हें केवल एस्ट्रोजन दिया जा सकता है।
बता दें कि हर महिला के लिए यह थेरेपी उपयुक्त नहीं होती। इसके जोखिम उम्र, हेल्थ कंडीशन और पीरियड्स हेल्थ पर निर्भर करते हैं। इसके अलावा थेरेपी के प्रकार और इसे कितने समय तक लिया जाता है, इस पर भी निर्भर करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, 60 वर्ष से कम उम्र की या मेनोपॉज शुरू होने के 10 वर्षों के भीतर की स्वस्थ महिलाओं में, यदि लक्षण गंभीर हैं और कोई बड़ा जोखिम कारक नहीं है, तो हार्मोन थेरेपी के फायदे हो सकते हैं।