पित्त असंतुलन से परेशान व्यक्ति (सौ. एआई) 
हेल्थ

शरीर में बढ़ा पित्त बिगाड़ सकता है पूरा सिस्टम! कंट्रोल करने के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

Pitta Control Diet: आजकल गलत खानपान, ज्यादा मसालेदार भोजन और अनियमित दिनचर्या के कारण शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या आम हो गई है। इससे पाचन खराब होना, एसिडिटी और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

प्रीति शर्मा

High Pitta Symptoms: हमारा शरीर वात, पित्त और कफ के संतुलन पर टिका है। इनमें से पित्त अग्नि और जल का मेल माना जाता है। जिन लोगों की प्रकृति पित्त प्रधान होती है उनके शरीर में मेटाबॉलिज्म तो तेज होता है लेकिन वे अक्सर अत्यधिक शारीरिक गर्मी, एसिडिटी और जल्दी गुस्सा आने जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं। अगर समय रहते खान-पान और जीवनशैली में बदलाव न किया जाए तो यह असंतुलन गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है।

क्या खाएं और किससे बचें

पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए शरीर को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। विशेषज्ञों के अनुसार आहार में जौ, चावल और गेहूं जैसे हल्के अनाज शामिल करने चाहिए। ये न केवल सुपाच्य होते हैं बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करते हैं। दूसरी ओर उड़द दाल और कुलथी जैसी भारी या तासीर में गरम दालों से दूरी बनाना ही समझदारी है क्योंकि ये पित्त को और भड़का सकती हैं।

फलों और सब्जियों का प्रभाव

फलों के चुनाव में हमेशा मीठे और रसीले विकल्पों को प्राथमिकता दें। सेब, नाशपाती, अंजीर और किशमिश पित्त को शांत करने में सहायक हैं। हालांकि खट्टे फलों से बचना चाहिए लेकिन आंवला और अनार इसके अपवाद हैं। इन्हें सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। सब्जियों की बात करें तो खीरा, करेला, मटर और परवल जैसी कड़वी या मीठी सब्जियां पित्त को संतुलित रखती हैं। वहीं बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन और पालक जैसी उष्ण (गरम) प्रकृति वाली सब्जियों का सेवन न्यूनतम करना चाहिए।

मसाले और डेयरी का सही तालमेल

किचन में मौजूद मसाले पित्त को नियंत्रित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सौंफ, धनिया, केसर और इलायची का उपयोग खाने में जरूर करें। ये मसाले ठंडक प्रदान करते हैं। इसके विपरीत हींग और काली मिर्च का अत्यधिक प्रयोग जलन बढ़ा सकता है। डेयरी उत्पाद जैसे ठंडा दूध, शुद्ध देसी घी और ताजी छाछ पित्त प्रकृति वालों के लिए अमृत के समान हैं।

लाइफस्टाइल में बदलाव है अनिवार्य

केवल भोजन ही नहीं बल्कि आपकी दिनचर्या भी पित्त को प्रभावित करती है। पित्त प्रधान लोगों को कड़ी धूप में निकलने से बचना चाहिए। मानसिक शांति के लिए हल्का संगीत सुनना और ठंडे वातावरण या पानी के स्त्रोतों (जैसे फाउंटेन) के पास समय बिताना लाभकारी होता है। यह न केवल आपके गुस्से को नियंत्रित करता है बल्कि शरीर के तापमान को भी सामान्य रखता है।

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