ब्लोटिंग से परेशान व्यक्ति (सौ.एआई) 
हेल्थ

बार-बार पेट फूलने की समस्या को न करें नजरअंदाज! शरीर दे रहा है ये बड़े खतरे का संकेत

Bloating Warning Signs: आजकल गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या और पाचन समस्याओं के कारण कई लोगों को बार-बार पेट फूलने की शिकायत हो सकती है। अक्सर लोग इसे सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते है।

प्रीति शर्मा

Stomach Bloating Problem: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट फूलना एक आम समस्या बन चुकी है लेकिन इसे मामूली समझकर टालना आपके स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। अगर पेट में लगातार भारीपन या दबाव महसूस हो रहा है तो यह पाचन तंत्र की कमजोरी या किसी बड़े आंतरिक रोग का शुरुआती संकेत हो सकता है।

अक्सर लोग सीने में जलन और पेट के भारीपन को एक ही समझ लेते हैं लेकिन मेडिकल की भाषा में एसिडिटी और ब्लोटिंग दो अलग स्थितियां हैं। जहां एसिडिटी खट्टे डकार और जलन पैदा करती है वहीं ब्लोटिंग आपके पेट को गुब्बारे की तरह फुला देती है। अगर यह समस्या आपके साथ रोज हो रही है तो इसे समझना और समय पर कदम उठाना अनिवार्य है।

एसिडिटी बनाम ब्लोटिंग

एसिडिटी का मुख्य लक्षण सीने में जलन और गले तक आने वाला खट्टा पानी है। इसके विपरीत ब्लोटिंग का मतलब है पेट के अंदर दबाव और सूजन का अहसास। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में पाचन शक्ति कमजोर होती है और वात बढ़ जाता है तब अधपका भोजन आंतों में गैस पैदा करता है जिससे पेट फूलने लगता है।

रोज पेट फूलना

विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभार भारी भोजन के बाद पेट फूलना सामान्य है लेकिन यदि यह आपकी रोज की कहानी बन गई है तो यह निम्नलिखित समस्याओं का संकेत हो सकता है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS): आंतों की कार्यक्षमता में गड़बड़ी।

हार्मोनल असंतुलन: विशेषकर महिलाओं में थायरॉयड की कमी आंतों की गति को धीमा कर देती है।

मेटाबॉलिक डिसऑर्डर: शरीर की ऊर्जा सोखने की प्रक्रिया में बाधा।

तनाव और आंतों का गहरा संबंध

चौंकाने वाली बात यह है कि आपका दिमाग और आंतें सीधे जुड़े होते हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अत्यधिक तनाव लेने से आंतों में मौजूद 'अच्छे बैक्टीरिया' कम हो जाते हैं। आयुर्वेद भी मानता है कि चिंता वात दोष को बढ़ाती है, जो सीधा पेट की सूजन और गैस का कारण बनती है।

डॉक्टर के पास जाने का सही समय

  • अगर आपको ब्लोटिंग के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं।
  • बिना किसी कारण के वजन कम होना।
  • पेट फूलने के साथ लगातार कब्ज या दस्त रहना।
  • भूख में अचानक कमी आना।
  • 2 से 3 सप्ताह तक समस्या का लगातार बने रहना।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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