नीली हल्दी फोटो.सोशल मीडिया
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Blue Turmeric Benefits: पीली हल्दी से अलग है नीली हल्दी, जानें इस दुर्लभ जड़ के 5 संभावित फायदे

Blue turmeric: नीली हल्दी यानी काली हल्दी आम पीली हल्दी से बिल्कुल अलग होती है। इसके कई संभावित फायदे हैं, जानें इसके एंटीऑक्सीडेंट और पाचन संबंधी फायदे और इस्तेमाल से जुड़ी सावधानियां।

रीता राय सागर

Blue Turmeric Health Benefits: हल्दी भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल सदियों से खाने के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में भी किया जाता रहा है। आमतौर पर हम सभी पीली हल्दी यानी Curcuma longa के बारे में जानते हैं, लेकिन हल्दी की एक दुर्लभ प्रजाति ऐसी भी है जिसका रंग अंदर से नीला-काला दिखाई देता है। इसे नीली हल्दी या काली हल्दी कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम Curcuma caesia है।

पीली हल्दी के मुकाबले नीली हल्दी की जड़ का रंग भी गहरा नीला या नीला-काला होता है और इसकी खुशबू भी काफी अलग होती है। इसमें कपूर जैसी तेज और हल्की कड़वी सी सुगंध होती है। इस हल्दी का इस्तेमाल रोजाना खाना पकाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि नीली हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है।

सूजन और जोड़ों की परेशानी में संभावित मदद

नीली हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से शरीर में इंफ्लेमेशन और जोड़ों की समस्या में किया जाता रहा है। हालांकि पीली हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पर कहीं अधिक शोध उपलब्ध हैं, नीली हल्दी में भी कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें मुख्य रूप से एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।

रोगाणुरोधी गुणों पर हो रही है रिसर्च

नीली हल्दी में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक में प्रयोगशाला अध्ययन के दौरान रोगाणुरोधी गुण पाए गए है। इसी वजह से पारंपरिक उपचारों में हल्दी की विभिन्न प्रजातियों का इस्तेमाल त्वचा की छोटी-मोटी समस्या और घाव के लिए किया जाता रहा है।

पाचन से जुड़ी परेशानी में पारंपरिक उपयोग

पारंपरिक चिकित्सा में नीली हल्दी का इस्तेमाल गैस, ब्लोटिंग और पाचन संबंधी असहजता के लिए किया जाता रहा है। इसके सुगंधित यौगिक पाचन तंत्र पर प्रभाव डालते हैं।

खांसी-जुकाम और सांस से जुड़ी परेशानी

नीली हल्दी का पारंपरिक उपयोग खांसी, कफ और सांस से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी किया जाता है। इसका तेज सुगंध और प्राकृतिक तेलों के कारण इसका इस्तेमाल पारंपरिक उपचार में किया जाता रहा है।

इस्तेमाल से पहले इन बातों का रखें ध्यान

खासकर गर्भावस्था, स्तनपान, किसी गंभीर बीमारी या नियमित दवाओं के सेवन की स्थिति में नीली हल्दी का सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

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