त्योहार की तैयारी में महिलाओं पर घर और परिवार की जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ जाता है।
लगातार काम, नींद की कमी और हर चीज परफेक्ट करने की कोशिश चिड़चिड़ापन बढ़ाती है।
काम बांटने और खुद के लिए समय निकाल कर तनाव को कम किया जा सकता है।
Festival Preparation Stress: त्योहार शुरु होने से पहले शुरु हो जाती है, घर की सजावट, नए कपड़े, स्वादिष्ट पकवान और परिवार के साथ समय बिताने वाली तस्वीरें। लेकिन इन तैयारियों के पीछे एक लंबी भागदौड़ भी होती है, जो अक्सर घर की महिलाओं के हिस्से आती है।
किस दिन क्या बनेगा, घर की सफाई कब होगी, किसके लिए क्या खरीदना है, मेहमानों के आने पर क्या व्यवस्था करनी है और पूजा की तैयारी कैसे पूरी होगी, इन सबकी योजना बनाने से लेकर उन्हें पूरा करने तक की जिम्मेदारी अकसर घर की महिलाएं संभालती है।
ऐसे में त्योहार नजदीक आते-आते कुछ महिलाओं को थकान, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और किसी काम में मन न लगने जैसी परेशानियां होने लगती हैं। इसे आम बोलचाल में फेस्टिव बर्नआउट कहा जाता है।
त्योहारों के दौरान रेगुलर काम के साथ-साथ महिलाओं पर कई अतिरिक्त काम की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। खाना बनाना, बच्चों की देखभाल और घर के दूसरे सदस्यों की जरूरतें पहले की तरह बनी रहती हैं। घर की सफाई, पर्दे और चादरें बदलना, अलमारी व्यवस्थित करना, सजावट करना और खरीदारी जैसे कई काम एक साथ शुरू हो जाते हैं। इस तरह महिलाओं पर काम का डबल डोज शुरु हो जाता है।
कई बार महिलाएं चाहती हैं कि त्योहार पर घर सुंदर दिखे, सभी के लिए पसंद का खाना बने, मेहमानों का अच्छे से स्वागत हो और परिवार का हर सदस्य खुश रहे। सोशल मीडिया पर दिखने वाली सजी हुई थालियां, खूबसूरत घर और परफेक्ट फेस्टिव लुक भी सोशली परफेक्ट दिखने के स्ट्रेस को बढ़ाते हैं।
सिर्फ काम करना ही थकान की वजह नहीं होता, बल्कि हर काम को याद रखना और उसकी योजना बनाना भी एनर्जी लेता है। किस सामान की कमी है, किस रिश्तेदार को बुलाना है, बच्चों के कपड़े तैयार हैं या नहीं, पूजा का सामान कहां से आएगा, जैसे मेंटल लोड बढ़ जाते हैं।
जो महिलाएं नौकरी करती हैं, उनके लिए त्योहारों की तैयारी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऑफिस के काम और डेडलाइन के साथ घर की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। कई बार छुट्टी के दिन भी आराम करने के बजाय सफाई, खरीदारी और रसोई के काम पूरे करने में निकल जाते हैं। इससे शरीर और दिमाग दोनों एग्जॉस्ट हो जाते हैं।
तैयारियां समय पर पूरी करने के लिए महिलाएं देर रात तक जागती हैं और सुबह जल्दी उठकर काम शुरू कर देती हैं। कई बार वे समय पर खाना नहीं खातीं, पानी पीना भूल जाती हैं। लगातार ऐसा होने पर थकान और तनाव बढ़ जाते हैं।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के टाइम यूज सर्वे 2024 के अनुसार, 15 से 59 वर्ष की उम्र की 92.9 प्रतिशत महिलाएं घर के सदस्यों के लिए बिना किसी वेतन के घरेलू काम करती हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 30.4 प्रतिशत था। इसी आयु वर्ग में 41 प्रतिशत महिलाएं परिवार के सदस्यों की देखभाल भी करती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 21.4 प्रतिशत था।
सर्वे में यह भी बताया गया कि महिलाओं ने औसतन रोज 305 मिनट इन कामों में बिताए, जबकि पुरुष प्रतिभागियों का औसत 86 मिनट था। देखभाल से जुड़े कामों में महिलाओं का औसत 140 मिनट और पुरुषों का 74 मिनट था।
परिवार के किसी सदस्य की सामान्य बात पर भी गुस्सा आने लगता है। लगातार थकान बनी रहती है, पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होने लगती है। कई बार काम करते समय बार-बार चीजें भूलना या एक काम पर फोकस न कर पाना और नींद का प्रभावित होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
हर काम की जिम्मेदारी अकेले न लें। घर के दूसरे सदस्यों को भी तैयारी में शामिल करें। कोई खरीदारी संभाल सकता है, कोई सफाई में मदद कर सकता है और कोई मेहमानों के लिए जरूरी इंतजाम कर सकता है।
पहले उन कामों की सूची बनाएं जो वास्तव में जरूरी हैं। घर की हर अलमारी व्यवस्थित करना या हर कोने को सजाना जरूरी नहीं। कुछ काम त्योहार के बाद भी किए जा सकते हैं।
त्योहार के दिन पूरा समय रसोई में बिताने से बचने के लिए कुछ तैयारियां पहले कर लें। मेन्यू छोटा रखें। हर पकवान घर पर बनाने का दबाव लेने के बजाय कुछ चीजें बाहर से मंगा लें।
लगातार कई घंटे काम करने के बजाय बीच-बीच में आराम करें। समय पर खाना खाएं, पर्याप्त पानी पिएं और नींद से समझौता न करें।
खुद को सोशल मीडिया के नजरिए से न आंकें। दूसरों के घर की सजावट, कपड़े या त्योहार की तैयारियां देखकर अपनी मेहनत को कम न समझें।