माता-पिता के प्रति निभाएं ये कर्तव्य (सौ.सोशल मीडिया)  
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क्या हम अपने माता-पिता के प्रति इन जिम्मेदारियों को निभाते हैं पढ़ें और गंभीरता से सोचें

अगर आप भी माता पिता के लिए यह खास दिन मनाना चाहते हैं तो बतौर बच्चे अपने कर्तव्यों के बारे में जान लें। आप चाहे बेटा हों या बेटी, माता पिता के लिए आपके कुछ कर्तव्य और जिम्मेदारी हैं, जिन्हें आपको पूरा करना चाहिए।

सीमा कुमारी

आज यानी 1 जून को समूचे विश्व भर में ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स मनाया जा रहा है। प्रेम, समर्पण, त्याग और करुणा का प्रतीक अभिभावक बच्चों के जीवन का सबसे पहला और जरूरी हिस्सा होते हैं। माँ अगर ज्ञान का स्रोत हैं तो पिता जीवन के मार्गदर्शक। माँ अगर जीवनदायिनी हैं तो पिता उस जीवन को संवारने वाले कर्ता।

कुल मिलकर कहे तो माँ और पिता दोनों ही हमारे जीवन के अनमोल रत्न हैं। वे हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं जो हमारा पालन-पोषण करते हैं, हमें सुरक्षा प्रदान करते हैं और हमें सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाते हैं।

माता पिता के इन्हीं महत्व को ध्यान में रखते हुए और उनके प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने के लिए हर साल 1 जून को ग्‍लोबल डे ऑफ पेरेंट्स मनाया जाता है। यह दिन माता पिता यानी पेरेंट्स को समर्पित है।

अगर आप भी माता पिता के लिए यह खास दिन मनाना चाहते हैं तो बतौर बच्चे अपने कर्तव्यों के बारे में जान लें। आप चाहे बेटा हों या बेटी, माता पिता के लिए आपके कुछ कर्तव्य और जिम्मेदारी हैं, जिन्हें आपको पूरा करना चाहिए।

माता-पिता के प्रति संतान का कर्तव्य :

माता-पिता का सम्मान करें

चाहे बेटा हों या बेटी, माता पिता के प्रति सम्मान की भावना होनी चाहिए। बच्चों के मन में माता पिता के लिए सम्मान की कमी नहीं होनी चाहिए। हर अभिभावक ये उम्मीद करता है कि उनका बच्चा कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, लेकिन उसकी नजरों में माता पिता के लिए आदर हो। आपको वो आदर बनाकर रखना चाहिए, ताकि अभिभावक आत्मसंतुष्ट रहें।

माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल

बच्चों का परम कर्तब्य एवं दायित्व यह होना चाहिए कि वे अपने अभिभावक के स्वास्थ्य का ख्याल भी रखें। जैसा कि आप जानते है कि अभिभावक अपनी सेहत से पहले बच्चे की चिंता करते हैं। नवजात शिशु जब देर रात तक सोता नहीं, तो अपनी नींद खोकर माता पिता उसके साथ जगते हैं। उनकी नींद पूरी नहीं होती, थकान और तबियत खराब होने लगती है। हालांकि वह अपने स्वास्थ्य की चिंता किए बिना बच्चे की सेहत का ध्यान देते हैं। बच्चा जब समझदार होने लगे तभी से उसे अपनी मां की थकान और पिता के पैर दर्द को समझकर उनको आराम देना चाहिए। उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जिम्मेदारी बच्चों की ही होती है।

माता-पिता के जरूरतों को समझें

माता-पिता हाथ पैर चलने तक आपकी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं। आपकी पसंद का खाना बनाने से लेकर, खिलौने और अच्छे स्कूल में पढ़ाने तक, पहला मोबाइल फोन दिलाने से आपके कपड़ों को व्यवस्थित करने तक हर जरूरत माता पिता पूरी करते हैं। एक समय आता है जब आपके माता पिता को आपकी जरूरत होती हैं।

ऐसे में एक उनकी जरूरतों को समझने की जिम्मेदारी बच्चे की होती है। बेटा हो या बेटी, माता पिता के रिटायरमेंट से पहले ही उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी उठा लें। नौकरी लगने पर माता पिता को पॉकेट मनी दे सकते हैं।

उनकी पसंद का खाना पीना, नए कपड़े और उनको व्यवस्थित करने का कर्तव्य बच्चों का ही होता है। हो सकता है कि उन्हें आर्थिक तौर पर आपकी जरूरत न हो, बल्कि आपके वक्त की जरूरत हो, आपको उन्हें वक्त देना चाहिए।

माता-पिता का सहयोग करें

बता दें, बच्चे के जन्म के बाद माता पिता उसकी हर जरूरत और इच्छा को बिना कहे जानकर उसे पूरा करते हैं। अबोध बालक के रोने मात्र से मां समझ जाती है कि बच्चा भूखा है या उसे कुछ परेशान कर रहा है।

वहीं माता-पिता जब बूढ़े होते हैं और शारीरिक तौर पर कमजोर होते हैं तो उनकी निर्भरता बच्चों पर बढ़ जाती है। ऐसे वक्त पर माता पिता का सहयोग करना, उनकी मदद करना हर बच्चे का कर्तव्य है। यह सहयोग शारीरिक तौर पर भी हो सकता है और आर्थिक तौर पर भी। माता पिता का सहारा बनना आपका कर्तव्य है।

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