फादर्स डे (फोटो.सोशल मीडिया)  
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Father’s Day: फादर्स डे पर पापा के साथ देखें ये 10 दिल छू लेने वाली बॉलीवुड फिल्में, यादगार बन जाएगा उनका दिन

Father’s Day: बॉलीवुड फिल्मों में फैमिली, वैल्यूज व परिवार से जुड़ाव को बखूबी दिखाया जाता है। फादर्स डे के मौके पर हम आपको 10 फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिसे आप अपने पापा के साथ देख सकते हैं।

रीता राय सागर

Must Watch Movie On Father’s Day 2026: पापा के बिना तो दुनिया अधूरी होती है। साल के सभी 365 दिन उनका साथ सिर पर छत की तरह होता है। ऐसे में फादर्स डे का दिन खासतौर पर पापा के लिए समर्पित किया गया है। इस दिन उनके लिए वक्त से अच्छा तोहफा क्या ही हो सकता है।

फादर्स डे के दिन पूरा दिन पापा के साथ बिताकर उन्हें स्पेशल फील कराया जा सकता है। इसके लिए आप उनके साथ बैठकर ऐसी फिल्में देख सकते हैं, जो खास तौर पर पापा के लिए ही डेडिकेटेड है।

पापा को समर्पित फिल्मों के नाम

डैडी (1989)

पूजा भट्ट के पिता महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म डैडी से पूजा भट्ट ने बॉलीवुड में एक्टिंग की शुरुआत की। कहानी एक शराबी पिता (अनुपम खेर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बेटी (पूजा) के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। बेटी को अपने माता-पिता के बारे में कुछ भी याद नहीं है। इस दौरान की जाने वाली चीजें आपको इमोशनल कर देगी।

दिल है कि मानता नहीं (1991)

महेश भट्ट ने अपनी बेटी पूजा भट्ट को एक बार फिर डायरेक्ट किया। कहानी में एक अमीर और बिगड़ी हुई लड़की (पूजा) एक फिल्म स्टार से शादी करने के लिए घर से भागती है, लेकिन रास्ते में उसे एक बेरोजगार पत्रकार (आमिर खान) से प्यार हो जाता है। फिल्म के सबसे यादगार पलों में से एक वह है, जब उसके पिता (अनुपम खेर) उसे अपने प्यार के साथ रहने के लिए अपनी ही शादी से भाग जाने के लिए कहते हैं।

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पापा कहते हैं (1996)

एक टीनएजर लड़की, जिसका रोल मयूरी कांगो सेशेल्स में अपने पिता से मिलने के लिए घर से भाग जाती है। हालांकि, उसका एक आदमी (अनुपम खेर) के साथ पिता-बेटी जैसा रिश्ता बन जाता है, जो असल में उसके पिता ही निकलते हैं।

कुछ कुछ होता है (1998)

'कुछ कुछ होता है' में शाहरुख खान और काजोल की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और रोमांस के अलावा भी एक चीज है जिसने कई लोगों का दिल जीत लिया और वह है अंजलि! सना सईद ने अंजलि का किरदार निभाया है। 8 साल की अंजलि अपनी माँ टीना (रानी मुखर्जी) की मौत के बाद अपने पिता को उनकी सबसे अच्छी दोस्त से फिर से मिलवाने की कोशिश कर रही है।

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क्या कहना (2000)

'क्या कहना' अपने समय की एक बोल्ड फिल्म थी। यह शादी से पहले प्रेग्नेंट होने जैसे संवेदनशील विषय पर आधारित है। अच्छी बात यह है कि प्रिया (प्रीति ज़िंटा) बख्शी का परिवार, खासकर उनके पिता (अनुपम खेर), बच्चे को जन्म देने के उनके फैसले का समर्थन करते हैं। समाज के कड़े विरोध के बावजूद, उनके पिता उनके साथ खड़े रहते हैं और एक मिसाल कायम करते हैं।

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मैं ऐसा ही हूँ (2005)

हैरी बवेजा की डायरेक्ट की हुई यह फ़िल्म 'आई एम सैम' का बॉलीवुड रीमेक है। इसमें अजय देवगन ने एक ऐसे सिंगल पिता का रोल प्ले किया है, जिन्हें डेवलपमेंटल डिसेबिलिटी है और जो अपनी बेटी गुनगुन (रुचा वैद्य) की कस्टडी के लिए लड़ते हैं।

दावत-ए-इश्क (2014)

अनुपम खेर एक बार फिर एक प्यार करने वाले पिता के रोल में हैं, लेकिन इस बार वह अपनी बेटी गुलरेज़ के साथ मिलकर धोखाधड़ी भी करते हैं। परिणीति चोपड़ा द्वारा निभाए गए अपनी बेटी के किरदार के लिए सही जीवनसाथी न मिलने पर, वह एक दूल्हे को नकली शादी के जाल में फंसाकर पैसे ऐंठने में उसका साथ देते हैं।

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पीकू (2015)

शूजित सरकार की फ़िल्म 'पीकू' में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के बीच पिता-बेटी का एक अनोखा और प्यारा रिश्ता दिखाया गया है। दीपिका ने फिल्म का मुख्य किरदार निभाया है। उन्होंने दिल्ली में रहने वाली एक बंगाली आर्किटेक्ट का किरदार प्ले किया है, जबकि अमिताभ बच्चन उनके बूढ़े पिता के रोल में हैं। फ़िल्म में उनके रिश्ते में आने वाले उतार-चढ़ाव को दिखाया गया है।

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भूमि (2017)

यह फिल्म बदले की भावना पर आधारित एक इमोशनल और संवेदनशील ड्रामा है, जिसमें संजय दत्त और अदिति राव हैदरी द्वारा निभाए गए पिता और बेटी के रिश्ते को दिखाया गया है। इस फिल्म की कहानी बेहद मार्मिक है।

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अंग्रेजी मीडियम (2020)

किसी और का सपना पूरा करने के लिए आप किस हद तक जा सकते हैं? और क्या हो अगर वह कोई और आपकी अपनी बेटी हो? अंग्रेज़ी मीडियम एक ऐसे आदमी की कहानी है, जो अपनी बेटी की लंदन में पढ़ने की इच्छा पूरी करने के लिए हर हद पार कर देता है। असल में भी और जज़्बाती तौर पर भी। इरफ़ान खान ने एक प्यार करने वाले पिता का किरदार निभाया है, जबकि राधिका मदान उनकी महत्वाकांक्षी बेटी तारिका के रोल में हैं।

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