24 Hours Work Culture: 83 साल की उम्र में भी अमिताभ बच्चन की प्रोफेशनल एनर्जी और काम के प्रति उनकी लगन के बारे में सभी कोई जानता है। अभिनेता ने हाल ही में अपने ब्लॉग के जरिए बताया कि लगातार काम और व्यस्त शेड्यूल के कारण वह करीब 24 घंटे तक काम करने वाली शिफ्ट का भी हिस्सा रहे हैं। इस दौरान खाना, नींद और अपने ब्लॉग पर नियमित रूप से लिखने तक का वक्त नहीं मिल पाता था।
अमिताभ बच्चन इन दिनों कौन बनेगा करोड़पति के 18वें सीजन की शूटिंग में व्यस्त हैं। उनके हालिया ब्लॉग अपडेट से पता चलता है कि काम का शेड्यूल इतना व्यस्त रहा कि उन्हें आराम और दूसरी व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
अमिताभ बच्चन की कार्यशैली की सबसे चर्चित बात यह है कि वह अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट को गंभीरता से लेते हैं। यह सोच सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। किसी भी नौकरी या प्रोफेशन में समय की पाबंदी, जिम्मेदारी और काम को पूरा करने की आदत व्यक्ति की प्रोफेशनल विश्वसनीयता बढ़ाती है।
अमिताभ बच्चन के अनुभव का एक पहलू यह भी है कि बड़े प्रोजेक्ट्स में समय की पाबंदी कितनी महत्वपूर्ण होती है। खासकर टेलीविजन जैसे माध्यम में शूटिंग शेड्यूल कई लोगों और तकनीकी टीमों पर निर्भर करता है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति की देरी पूरे शेड्यूल को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि उन्होंने अपने काम और तय शेड्यूल को प्राथमिकता दी।
अमिताभ बच्चन का उदाहरण प्रेरणादायक जरूर है, लेकिन लगातार 24 घंटे काम करना सामान्य वर्किंग मॉडल नहीं माना जाना चाहिए। लंबे समय तक नींद और आराम की अनदेखी करने से थकान, एकाग्रता और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
कमिटमेंट को गंभीरता से ले, जो जिम्मेदारी स्वीकार करें, उसे पूरा करने की कोशिश करें।
डेडलाइन का सम्मान करें, समय पर काम पूरा करना प्रोफेशनलिज्म का अहम हिस्सा है।
उम्र को काम के प्रति उत्साह की बाधा न बनने दें, अमिताभ बच्चन आज भी लगातार काम कर रहे हैं और नए प्रोजेक्ट्स का हिस्सा हैं।
सीखते रहने की आदत रखें और लंबे करियर में खुद को बदलते समय के साथ अपडेट रखना जरूरी है।
मेहनत के साथ संतुलन भी जरूरी है। उनकी कार्यशैली से प्रेरणा लेते समय यह भी याद रखना चाहिए कि पर्याप्त नींद, भोजन और आराम को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
लगातार बिना आराम के काम करते रहने से शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत ज्यादा थकान हो जाती है। इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। निर्णय लेने में परेशानी होने लगती है।
ऐसे काम करते रहने से एंग्जाइटी का खतरा बढ़ जाता है। इससे कई बार अपराध बोध होने लगता है और हार जाने या कुछ खोने का डर लगने लगता है। यह स्थिति आगे चलकर डिप्रेशन का कारण बन सकती है।
इससे सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है नींद पर। व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता है, जिससे धीरे-धीरे अनिद्रा की समस्या पैदा हो जाती है और फिर चाहकर भी नींद नहीं आती। यहां तक कि सोते समय भी काम के ही सपने आते हैं।
सबसे बड़ा खतरा रहता है स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी का। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार बहुत देर तक काम करने से स्ट्रेस यानी तनाव का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में ज्यादा स्ट्रेस के कारण कार्डियोमायोपैथी का खतरा बढ़ जाता है। इसमें दिल की मसल्स कमजोर होने लगती हैं और हार्ट की फंक्शनिंग पर भी असर पड़ता है।