भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण ने पकड़ी रफ्तार; अब सिर्फ 269 किमी ट्रैक बाकी, 2027 में पूरा होगा ब्रॉडगेज नेटवर्क

Indian Railways News: भारतीय रेलवे का ब्रॉडगेज नेटवर्क 99.6 प्रतिशत विद्युतीकृत हो चुका है। 70,412 किमी में से 70,143 किमी ट्रैक पर विद्युतीकरण पूरा हो गया है और अब केवल 269 किमी नेटवर्क बाकी है।
Indian Railways Nears End of Diesel Era, 99.6% Broad-Gauge Network Electrified
भारतीय रेलवे (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Indian Railways Electrification 2026: भारतीय रेलवे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क के लगभग शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के बेहद करीब पहुंच गया है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में देश का 99.6 प्रतिशत ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क विद्युतीकृत हो चुका है। रेलवे ने इसी वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा है।

31 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक देश के कुल 70,412 किलोमीटर ब्रॉडगेज नेटवर्क में 70,143 किलोमीटर पर बिजली की लाइन बिछाई जा चुकी है। अब महज 269 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण बाकी है। रेलवे का दावा है कि शेष काम पूरा होते ही देश का ब्रॉडगेज नेटवर्क पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो जाएगा।

12 साल में 48 हजार किमी से अधिक ट्रैक विद्युतीकृत

रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक आजादी के बाद वर्ष 1925 से 2014 तक देश में सिर्फ 21,801 किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण हुआ था। इसके बाद वर्ष 2014 से 2026 के बीच महज 12 वर्षों में 48,000 किलोमीटर से अधिक ट्रैक को बिजली से जोड़ा गया। वर्ष 2019 से 2024 के दौरान प्रतिदिन औसतन 16.7 किलोमीटर रेल लाइन को इलेक्ट्रिक बनाने का रिकॉर्ड भी बना।

25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ काम

उत्तर प्रदेश में 9,658 किमी, बिहार में 4,169 किमी, गुजरात में 4,900 किमी, महाराष्ट्र में 5,973 किमी और मध्य प्रदेश में विद्युतीकरण का काम पूरा हो चुका है। कुल 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो गया है। अब राजस्थान, तमिलनाडु, असम, कर्नाटक और गोवा समेत कुछ हिस्सों में शेष काम पूरा किया जा रहा है।

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3,960 करोड़ रुपये का प्रावधान

रेलवे ने 2026-27 में विद्युतीकरण के लिए 3,960 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लक्ष्य पूरा होने के बाद डीजल पर निर्भरता घटेगी और आयातित ईंधन पर होने वाला खर्च कम होगा।

पर्यावरण से लेकर यात्रियों तक होगा फायदा

रेलवे के पूर्ण विद्युतीकरण से कार्बन उत्सर्जन में कमी, वायु प्रदूषण में नियंत्रण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इलेक्ट्रिक ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की रफ्तार और समयपालन में सुधार की उम्मीद है। मालगाड़ियों की गति बढ़ने से सामान की आपूर्ति तेज होगी, जिसका असर परिवहन लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है। रेलवे इसे ‘जीरो कार्बन एमिशन’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।

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