JPSC Protest Latest Updates: रांची में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को करीब 5 घंटे तक तीसरे दौर की बैठक। छात्र डेलिगेशन ने बताया कि छात्रों के करीब 50 फीसदी से अधिक मांगों को सरकार ने मान ली है। 14वीं JPSC, JPSC, परीक्षाओं को रद्द करने के लिए सरकार सहमत हो गई है। सरकार के साथ JPSC रिफॉर्म पर सहमति बन गई है। डेलिगेशन ने बताया कि बैठक में CGL पर कोई सहमती नहीं बन पाई है। इसके अलावा TDPL द्वारा आयोजित कराई गई परीक्षा रद्द कराने पर भी सहमति नहीं बनी।
JPSC-JSCC उम्मीदवारों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद छात्र नेता कुणाल ने कहा ति मैं स्पष्ट कर दूं कि हमारा विधानसभा घेराव का जो कार्यक्रम है, वो शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। हमारी मांग CBI जांच की है, हम इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
JPSC-JSCC उम्मीदवारों के विरोध-प्रदर्शन के बीच उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद झारखंड सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज तीसरे दिन की वार्ता और व्यापक विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों पर सरकार ने तय किया कि 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी अनियमितताओं को दो तरीके से देखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी। इसके अलावा वित्तीय असर और अवैध वित्तीय लेन-देन के सबूतों को देखते हुए ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाद एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी और 90 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि जरूरी सुधारों के बारे में, सरकार ने कहा कि इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर सुधार किया जाएगा। इन चर्चाओं के बाद, छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग की और सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि चूंकि परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है।
मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि सरकार ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर जांच की देखरेख करने का प्रस्ताव दिया मगर छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हमारा मानना है कि सरकार उठाए गए 98 प्रतिशत बिंदुओं पर सहमत हो गई और बाकी दो प्रतिशत जो विशेष रूप से CGL परीक्षा रद्द करने की मांग है। इस पर सरकार का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर जो परीक्षा कराई गई है, उसे सरकार अपनी तरफ से रद्द नहीं कर सकती है।
छात्रों में विश्वास पैदा करने के लिए सरकार CID के काम की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने को तैयार थी, ताकि अगर छात्रों को लगे कि CID उनकी बात नहीं सुन रही है, तो वे अपनी चिंताएं व्यक्त कर सकें। कुल मिलाकर, इन प्रक्रियाओं और प्रयासों के बाद हमारा मानना है कि सरकार ने आंदोलन को समाप्त करने के अपने प्रयास में छात्रों के प्रति सच्ची सद्भावना और संवेदनशीलता दिखाई है