झारखंड छात्र आंदोलन सोर्स-(सोशल मीडिया)
झारखंड

झारखंड में फिर भड़केगा छात्र आंदोलन? सोरेन सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, 18 अक्टूबर से सड़क पर उतर सकते छात्र

Student Movement: झारखंड में छात्र फिर सड़कों पर उतर सकते हैं। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने साफ कहा है अगर सरकार वादाखिलाफी करती है तो छात्र अपनी जायज मांग के लिए 18 अक्टूबर से सड़क पर उतरेंगे।

आशीष शुक्ला

Jharkhand Student Movement: झारखंड में छात्रों ने अपनी हक के लिए कठिन लड़ाई लड़ी जिसके बाद सोरेन सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के बाद छात्रों ने आंदोलन को रद्द किया था। इसी बीच एक बार फिर JPSC रिफॉर्म मंच ने सोरेन सरकार को अल्टीमेटम दिया है। छात्रों से जुड़े मंच ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे 18 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करेंगे।

मीडिया से बातचीत के दौरान है। JPSC रिफॉर्म मंच के छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि रद्द की गई विभिन्न परीक्षाओं, जिनमें JSSC CGL और JPSC से जुड़ा मामला है। 7 अक्टूबर को झारखंड उच्च न्यायालय में अहम सुनवाई  होनी है। छात्रों की नजर इस सुनवाई पर टिकी हुई है।

कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे छात्र

छात्र नेता पासवान के मुताबिक, पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने अपना काउंटर-एफिडेविट दाखिल किया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने उन परीक्षाओं को रद्द करने के आधार से जुड़ी CID जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा था। छात्रों का दावा है कि 17 अगस्त को कैबिनेट के फैसले के आधार पर परीक्षाएं रद्द की गई थीं, लेकिन 5 अक्टूबर तक संबंधित CID रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई है।

छात्रों की मांग है कि सरकार 17 अगस्त के कैबिनेट के फैसले और CID जांच रिपोर्ट को हाईकोर्ट के सामने रखे और इस मामले में सरकार मजबूती से अपना पक्ष पेश करे। उनका कहना है कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में ऐसा निर्णय होना चाहिए, जिससे छात्रों के हितों की रक्षा हो सके।

छात्र आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?

झारखंड के छात्रों ने झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया में खामियों का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू किया। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की प्रमुख मांग परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया में सुधार करने को था। 24-25 दिन से अधिक चले इस आंदोलन में अंत में सरकार को छात्रों की मांग के सामने झुकना पड़ा था।

सरकार ने क्या लिया फैसला?

पूरे झारखंड के छात्र एकत्रित होकर अपनी जायज मांगों को लेकर करीब 24-25 दिन तक आंदोलन पर बैठे रहे। इसके बाद झारखंड सरकार ने JSSC CGL समेत कई विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। साथ ही 2014 से हुई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की CID जांच कराने की बात कही गई।

क्यों खत्म नहीं हुआ विवाद?

छात्रों के दबाव को देखते हुए हेमंत सोरेन सरकार के परीक्षा रद्द कर दिया। इसके बाद चयनित छात्र सोरेन सरकार के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दे दिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने JSSC CGL, CDPO और JPSC से जुड़ी कुछ परीक्षाओं/नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी।

जिसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब और CID जांच से संबंधित रिपोर्ट पेश करने को कहा। सितंबर में हाईकोर्ट ने CID जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त जज जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को बतौर मॉनिटर नियुक्त किया था। कोर्ट के तरफ से 5 अक्टूबर तक CID की रिपोर्ट पेश करने की डेड लाइन दी गई थी।

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