रांची में विधानसभा मार्च Social Media
झारखंड

ये सरकार कायर है...अब बातचीत नहीं, रांची में विधानसभा तक पहुंचे छात्र, देवेंद्र महतो बोले- फैसला चाहिए

Jharkhand Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस से टकराव हुआ। लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन के बीच देवेंद्र महतो ने बातचीत से इनकार किया।

अर्पित शुक्ला

Jharkhand Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। आंदोलन के 17वें दिन हजारों छात्रों ने पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर मार्च किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार टकराव हुआ। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्र सड़क पर बैठ गए। वहीं, पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस से मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे ही मार्च में हिस्सा लिया।

देवेंद्र महतो बोले- अब सरकार से कोई बातचीत नहीं

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच तीन दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने साफ कहा कि अब सरकार से आगे कोई बातचीत नहीं होगी और सरकार को छात्रों की मांगों पर फैसला लेना होगा।

देवेंद्र महतो ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।

बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ते रहे छात्र

छात्रों के मार्च को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी। हालांकि, प्रदर्शनकारी लगातार आगे बढ़ते रहे। इसी दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने बल प्रयोग किया।

विधानसभा की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे।

पांच घंटे चली बातचीत, फिर भी नहीं निकला समाधान

इससे पहले रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे से ज्यादा समय तक बातचीत हुई थी। सरकार की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने सहित कई मांगों पर सहमति जताने की बात सामने आई थी। सरकार का दावा था कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं।

हालांकि, छात्र प्रतिनिधि JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े रहे। इन मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई।

JPSC मामले में भी बड़ा घटनाक्रम

छात्र आंदोलन के बीच JPSC से जुड़े घटनाक्रम ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। रविवार को आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आई थी।

इसके बाद सोमवार को झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को CID ने गिरफ्तार किया। उन पर 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को पैनल में शामिल कराने समेत कई आरोप लगाए गए हैं।

इस कार्रवाई के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनके द्वारा उठाए जा रहे सवालों को अब गंभीरता से लेने की जरूरत है।

लिखित फैसले तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

फिलहाल छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन खत्म नहीं होने वाला है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से लिखित फैसला नहीं दिया जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

दूसरी ओर, प्रशासन ने विधानसभा और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। ऐसे में अब सरकार के अगले कदम के साथ-साथ छात्रों के आंदोलन की आगे की रणनीति पर भी नजर बनी हुई है।

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