रांची/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच INDIA गठबंधन के भीतर दरारें उभरने लगी हैं। झारखंड की प्रमुख पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गठबंधन से नाराजगी जताई है। पार्टी का आरोप है कि बिहार चुनाव को लेकर INDIA गठबंधन की बैठकों में उसे नजरअंदाज किया गया है। यही नहीं, JMM ने चेतावनी दी है कि अगर उसे उचित सम्मान और भागीदारी नहीं मिली तो वह बिहार की 15 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इस सियासी नाराजगी ने INDIA ब्लॉक के एकजुटता के दावों ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
JMM का कहना है कि वह अब राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की ओर बढ़ रही है और आदिवासी समाज की मजबूत आवाज को बिहार में दबाया नहीं जा सकता। वहीं, RJD ने भी झारखंड में भेदभाव का आरोप लगाते हुए यह सवाल उठाया है कि जब उनके विधायक सरकार में हैं, तो गठबंधन में उन्हें समान भागीदारी क्यों नहीं दी जा रही। झारखंड से शुरू हुई नाराजगी अब बिहार में INDIA गठबंधन की साख पर असर डालने लगी है।
JMM की नाराजगी और चुनावी चेतावनी
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ कर दिया है कि वह अब केवल झारखंड की सीमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी के मुताबिक, 13वें अधिवेशन में राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति तय की गई है और बिहार की आदिवासी व पिछड़े समुदाय वाली सीटों पर मजबूत पकड़ के आधार पर वह 15 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। बांका जिले की चकई, कटोरिया, झाझा, जमुई जैसी सीटों पर फोकस करते हुए पार्टी ने INDIA गठबंधन को आगाह किया है कि अगर उसे दरकिनार किया गया, तो इसका फायदा सीधा भाजपा को होगा।
RJD की झारखंड में अनदेखी की शिकायत
RJD ने भी झारखंड में उपेक्षा का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव पूर्व किए गए वादों के बावजूद उन्हें केवल छह सीटें दी गईं, जबकि 22 सीटों पर दावा किया गया था। तेजस्वी यादव की सक्रियता और पार्टी के चार विधायकों के सरकार में होने के बावजूद बोर्ड-निगम और समन्वय समिति जैसी अहम जगहों पर उन्हें शामिल नहीं किया गया। RJD का यह भी सवाल है कि झारखंड में उनके सहयोगी वास्तव में कौन हैं, जब उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी तक नहीं मिल रही।