Mehbooba Mufti on Pok Protest: जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती को अक्सर पाकिस्तान से बेहतर रिश्तों की पैरवी करने के लिए सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बार महबूबा मुफ्ती ने ऐसे कुछ कह दिया है जिससे पाकिस्तानी सरकार और सेना बुरा मान सकती है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में लोग लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ पदर्शन कर रही है। इसे पाकिस्तानी सेना बर्बरता-अत्याचार से कुचलने की कोशिश कर रही है। जिसकी चौतरफा आलोचना हो रही है। इसी बीच महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एलओसी के उस पार कश्मीर के दूसरे हिस्से से आ रही तस्वीरें बहुत दुखद हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से कुचला जाना पीड़ादायक है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान सरकार को सलाह देते हुए कहा कि, सरकार को ज्यादा मानवीय रवैया अपनाना चाहिए और बल प्रयोग की जगह बातचीत से मामले को सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खबरों से पता चला है कि प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग जायज है और उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। कोई भी देश अपने ही लोगों को कमजोर करके या बंदूक के दम पर उनकी आवाज दबाकर मजबूत नहीं बनता।
महबूबा मुफ्ती ने कहा पाकिस्तानी सरकार को अपनी दमनकारी नीति बंद करनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना रोकना चाहिए। कश्मीर के लोग सम्मान, न्याय और अपनी बात रखने के अधिकार के हकदार हैं, न कि दमन के।
जानकारी के मुताबिक, पीओके के लोग स्थानीय निकाय चुनावों के विरोध और महंगाई व राजनीतिक भेदभाव के खिलाफ पाकिस्तान सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि पाक सरकार लोगों से बातचीत के स्थान पर सेना के जरिए उन्हें कुचलने की कोशिश कर रही है। जानकारी के मुताबिक हाल ही में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च का आयोजन किया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने नित्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसा दीं, इस गोलबारी में कई लोगों की मौत हो गई। पाकिस्तानी सेना ने मौतों की संख्या को दुनिया से छिपाने के लिए घटनास्थल से शवों को जबरन हटा दिया।
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इसके अलावा पीओके में मीरपुर और अन्य जिलों के मुख्य अस्पतालों को पाकिस्तानी सेना ने अपनी छावनी में बदल दिया है। आरोप है कि सेना घायल नागरिकों के परिजनों को न तो उनसे मिलने दिया जा रहा है और न ही मृतकों के शव सौंपे जा रहे हैं। साथ ही अस्पताल के बाहर भीड़ इकट्ठा होन पर फौज ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए अस्पतालों के बाहर भी गोलियां चलाई गई हैं।