जम्मू-कश्मीर के डोडा में 4.2 का तीव्रता भूकंप आया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
जम्मू कश्मीर

आधी रात को भूकंप के झटकों से दहली कश्मीर घाटी, 4.2 रही तीव्रता, घर से निकलकर भागे लोग

Doda Magnitude 4.2 Earthquake: जम्मू-कश्मीर के डोडा में रविवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.2 थी। भूकंप का केंद्र 5 किलोमीटर गहराई पर स्थित था।

अक्षय साहू

Earthquake in Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में रविवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों की नींद उड़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, यह भूकंप रात 1 बजकर 25 मिनट पर आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 मापी गई। भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से मात्र 5 किलोमीटर नीचे, 33.08 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 76.17 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। झटकों के कारण इलाके में दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए।

इससे पहले, शुक्रवार 27 फरवरी को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह झटका दोपहर लगभग 1 बजकर 20 मिनट पर आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.4 थी। भूकंप का केंद्र बांग्लादेश में था, लेकिन इसके झटके कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न जिलों में भी महसूस किए गए।

पूर्वी में नेपाल में भी आया भूकंप

नेपाल के पूर्वी हिस्से में भी शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। यह भूकंप सुबह 3 बजकर 18 मिनट पर आया और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.7 मापी गई। भूकंप का केंद्र नेपाल के संखुवासभा जिले में था। टॉपके गोला नामक क्षेत्र काठमांडू से लगभग 400 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। झटकों के कारण आसपास के कई जिलों में भी लोग घरों से बाहर निकलने को मजबूर हुए।

नेपाल में भूकंपों का पुराना इतिहास

नेपाल में भूकंपों का इतिहास काफी पुराना है। 2015 में आए बड़े भूकंप ने देश में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और व्यापक नुकसान हुआ। इसके बाद से नेपाल में भूकंप के प्रति जागरूकता बढ़ी है। स्थानीय लोग किसी भी अप्रत्याशित भूकंप के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

नेपाल दुनिया के सबसे भूकंप-प्रवण देशों में शामिल है और यह 11वें स्थान पर है। हिमालय क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों से अक्सर भूकंप आते हैं। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपसी टकराव के कारण यह क्षेत्र भूकंप के लिए संवेदनशील है। हालांकि, आम तौर पर नेपाल में आने वाले भूकंपों की तीव्रता अधिक नहीं होती, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान का खतरा कम रहता है। फिर भी, स्थानीय लोग भूकंप के झटकों के बाद सतर्क रहते हैं और आपातकालीन राहत कार्यों में तत्पर रहते हैं। 

युवराज से उम्मीद छोड़ दे देश...राहुल गांधी पर बरसे CM योगी, हामिद अंसारी के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

चंद्रशेखरन की ताजपोशी पर छिड़ी रार, Tata Trust ने खारिज किया बोर्ड का फैसला

रची जा रही साजिश...हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर भड़के मौलाना, लगाए गंभीर आरोप

दिया जलाने के लिए पैसा, हॉस्टल के लिए क्यों नहीं? राहुल गांधी का PM मोदी से सीधा सवाल

भारत-जापान की वायुसेना के बीच वीर गार्जियन-2026 युद्ध अभ्यास जारी, जोधपुर पहुंचे दोनों देशों के एयर चीफ- VIDEO