जेल सिस्टम में सुधार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, महिला कैदिंयो को लेकर दिया बड़ा फैसला, पूर्व जज को सौंपी कमान

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने जेल सिस्टम सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया, विशेष रूप से महिलाओं के लिए 'खुली जेल' का अधिकार और सुधार केंद्रों के रूप में जेलों का विकास।
Supreme Court Decision Women Prisoners
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court Decision Women Prisoners: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में जेल सिस्टम के सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है, और यह तय किया है कि इसे सुधार केंद्र में बदलने की दिशा में कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि कैदियों के लिए सुधार का तरीका बदलाव की दिशा में बड़ा कदम होना चाहिए। विशेष रूप से महिलाओं के मामलों में कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (OCI) या 'खुली जेल' में रहने का अधिकार होना चाहिए।

इसके तहत अब जेलों को सिर्फ लेबर कैंप के रूप में नहीं बल्कि वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि कैदी अपने कौशल का विकास कर सकें। इसके साथ ही कैदियों को उनके परिवारों से नियमित रूप से मिलने का अधिकार भी सुनिश्चित किया जाएगा।

पूर्व जज को कमेटी चेयरपर्सन नियुक्त किया

इस फैसले को 138 पेजों में विस्तार से लिखा गया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता शामिल थे, ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एस आर भट को एक उच्च कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया है। यह कमेटी छह महीने के भीतर ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन के संचालन के लिए एक समान न्यूनतम मानक तय करेगी। जिन राज्यों के पास ओपन जेल नहीं हैं, उन्हें इसे स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को निर्धारित की गई है।

महिलाओं के अधिकारों पर जोर

जस्टिस मेहता ने अपने फैसले में विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर महिला कैदियों को OCI से बाहर रखा जाता है या उनके योग्य होने के बावजूद उन्हें OCI में स्थानांतरित नहीं किया जाता, तो यह जेंडर भेदभाव के समान होगा, जो संविधान के आर्टिकल 14 और 15(1) का उल्लंघन है।

आर्टिकल 21 का उल्लंघन

जस्टिस संदीप मेहता ने आगे कहा कि यह उनके आर्टिकल 21 के तहत मिलने वाले सम्मान के साथ जीने के अधिकार का भी उल्लंघन करता है। जस्टिस मेहता ने यह स्पष्ट किया कि महिला कैदियों को पुनर्वास के समान अवसर से वंचित रखना संविधान की भावना के खिलाफ है, और इसे बदलने के लिए तत्काल सुधारों की आवश्यकता है। इस फैसले से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट सुधार के माध्यम से भारतीय जेल प्रणाली को बेहतर और न्यायपूर्ण बनाने का समर्थन करता है।

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