Rahul Gandhi Protest: राजधानी दिल्ली में छात्र और विपक्ष दोनों ही सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष ने सरकार से संसद में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग की है। सरकार भी इसके लिए तैयार हो गई है। लेकिन इसके बाद भी आज मानसून सत्र शुरू होने के तीसरे दिन भी संसद ठप पड़ी है। तीन दिन में एक भी दिन ऐसा नहीं गया है कि सदन में पांच मिनट भी बिना शोर-शराबे के चर्चा हुई हो। आज लगातार तीसरे विपक्ष के हंगामे के बाद संसद को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। ऐसे में सवाल आता है कि जब सरकार और विपक्ष दोनों ही चाहते हैं कि सदन में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा हो, तो फिर क्यों संसद ठप पड़ी है? सरकार और विपक्ष के बीच कौन सा खेल चल रहा है? इसका छात्रों के आंदोलन पर क्या असर पड़ेगा?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस समय हजारों छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। छात्रों के इस प्रदर्शन को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किए जाने के बाद केंद्र सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए सहमत हो गई है। हालांकि, सरकार की सहमति के बाद विपक्ष ने अपना रुख बदलते हुए अब नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग रख दी है। इससे यह मामला एक बार फिर राजनीतिक खींचतान के चलते अधर में लटकता नजर आ रहा है।
पेपर लीक के मामले पर विपक्ष के तीखे तेवर और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्र सरकार ने संसद में चर्चा कराने की सहमति जताई है। हालांकि, चर्चा किस नियम के तहत हो, इसे लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि मोदी सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और पेपर लीक से जुड़े हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी चर्चा से बच रहे हैं, क्योंकि सदन में बहस होने पर उनका दोहरा चरित्र सामने आ जाएगा।
नितिन नबीन ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि छात्र, युवा और NEET सहित हर मुद्दे पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, एनडीए सरकार ने युवाओं के लिए स्टार्टअप, यूनिकॉर्न और आत्मनिर्भर भारत जैसे अवसर तैयार किए हैं, जबकि विपक्ष युवाओं को केवल आंदोलन और विरोध की राजनीति तक सीमित रखना चाहता है।
दूसरी तरफ राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पेपर लीक पर तत्काल चर्चा की मांग की। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात कर सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने का संदेश दिया।
हालांकि, सरकार की सहमति के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हुआ। राहुल गांधी ने मांग रखी कि पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और उसके बाद राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा कराई जाए। विपक्ष की मांग है कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर संसद का पूरा निर्धारित कामकाज स्थगित कर विशेष चर्चा कराई जाए। उनका तर्क है कि यह करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा आपातकालीन विषय है, इसलिए इसे सामान्य कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।
सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही, लेकिन उसका कहना है कि बहस सामान्य संसदीय नियमों के तहत होनी चाहिए। सरकार का तर्क है कि विपक्ष जितनी देर चाहे इस विषय पर चर्चा करे, सरकार हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। इसी प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और नियम 267 के तहत चर्चा की मांग से विपक्ष पीछे नहीं हटेगा। वहीं, राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी विपक्ष चर्चा से पहले शर्तें रखता है, तो इससे उसकी मंशा पर सवाल उठते हैं। उनका कहना है कि सरकार चर्चा से नहीं भाग रही, बल्कि विपक्ष ही बहस के बजाय राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहा है।
राज्यसभा का नियम 267 किसी अत्यंत महत्वपूर्ण और तत्काल जनहित के मुद्दे पर सदन की निर्धारित कार्यवाही स्थगित कर विशेष चर्चा कराने का प्रावधान है। इसकी अनुमति देना पूरी तरह सभापति के विवेक पर निर्भर करता है। इस नियम का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है।
सरकार और विपक्ष के बीच पूरा विवाद सिर्फ पेपर लीक पर चर्चा का नहीं, बल्कि चर्चा की प्रक्रिया का है। विपक्ष चाहता है कि राज्यसभा के नियम 267 के तहत सदन का निर्धारित कामकाज स्थगित कर केवल इसी मुद्दे पर बहस हो। यदि ऐसा होता है, तो इसे विपक्ष अपनी राजनीतिक और नैतिक जीत के रूप में पेश कर सकेगा और यह संदेश जाएगा कि उसने सरकार को युवाओं के मुद्दे पर विशेष चर्चा के लिए मजबूर कर दिया।
वहीं, सरकार ऐसा संदेश नहीं देना चाहती कि वह विपक्ष के दबाव में आई है या संसद की निर्धारित कार्यसूची पर उसका नियंत्रण कमजोर पड़ा है। सरकार का मानना है कि सामान्य नियमों के तहत होने वाली चर्चा में वह न केवल पेपर लीक के सवालों का जवाब दे सकेगी, बल्कि अपनी उपलब्धियां भी रख पाएगी और पिछली सरकारों के कार्यकाल पर भी सवाल उठा सकेगी।